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बत्रा ने पद छोड़ा, गिल पर बरसे

भारतीय हॉकी फेडरेशन के उपाध्यक्ष नरेंद्र बत्रा ने भारत की आेलम्पिक में न पहुंच पाने की नाकामी के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हॉकी प्रमुख के.पी.एस. गिल के मुखर आलोचक नरेंद्र बत्रा ने भारत की नाकामयाबी के लिए गिल की तानाशाही नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने भारतीय हॉकी फेडरेशन के आला अधिकारियों से भी त्यागपत्र देने की अपील की है। बत्रा ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा आईएचएफ के सचिव के योति कुमारन को भेज दिया है। चिली के सेंटियागो में आेलम्पिक क्वालीफायर में भारत के ब्रिटेन से हारने पर बत्रा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस शर्मनाक घटना की सभी शीर्ष अधिकारियों को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। बत्रा ने कहा, ‘मेरे पास शब्द नहीं हैं। यह शर्मनाक है। मैं निराश हूं। मैंने भरसक कोशिश की लेकिन असफल रहा। मेरा विचार था कि हॉकी के पुनरूत्थान के लिए प्रयास किया जाए। फेडरेशन के सभी अधिकारियों को इस्तीफा ने देना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘आईएचएफ मौजूदा पदाधिकारियों की राजनीति की भेंट चढ़ गया है। महासंघ में कोई भी व्यक्ित किसी पद पर आठ साल से अधिक नहीं रह सकता। मगर इस प्रावधान की सरासर अनदेखी की गई है।’ गिल को निशाने पर लेते हुए बत्रा ने कहा, ‘कोच जोकिम कार्वाल्हो की नियुक्ित आईएचएफ ने बांम्बे हॉकी संघ को खुश करने की नीति के तहत की थी।’ उन्होंने कहा, ‘मैं कार्वाल्हो की योग्यता की बात नहीं कर रहा हूं। लेकिन उनकी नियुक्ित का तरीका गलत था।’ उन्होंने आरोप लगाया कि जो कोच खुलकर बोलते थे उन्हें बदल दिया गया। कार्वाल्हो को जी हुजूरी करने के कारण बनाए रखा गया। बत्रा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुरेश शर्मा सरीखे पुलिसकर्मी चीफ ऑफ प्रोटोकॉल के पद पर काम कर रहे हैं। दुखद है कि कार्वाल्हो को सुरेश शर्मा को रिपोर्ट करना पड़ता है। एक पुलिसकर्मी को चीफ सेलेक्टर बना दिया गया। उन्होंने टीम के चयन में भी मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि आईएचएफ को इस शर्मनाक स्थिति से उबारने के लिए केंद्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।

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