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प्रवर समिति की बैठक न होना प्रक्रियागत त्रुटि :महाधिवक्ता

प्रदेश के महाधिवक्ता ज्योतीन्द्र मिश्र ने सोमवार को विधानपरिषद में उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (यूपीकोका) 2007 विधेयक पर परामर्श दिया। विधेयक दोबारा विधान परिषद की प्रवर समिति को संदर्भित किए जाने और समिति के सभापति स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा बैठक न बुलाने के बीच ही विधानसभा द्वारा विधेयक को पुन: विधेयक पारित कर विधानपरिषद को प्रेषित किए जाने के मामले में परामर्श के लिए विधानपरिषद के सभापति चौधरी सुखराम सिंह ने महाधिवक्ता को आमंत्रित किया था।ड्ढr महाधिवक्ड्डष्ता ने कहा कि प्रवर समिति की बैठक किन अपरिहार्य कारणों से नहीं बुलाई गई यह समिति के सभापति ही बता सकते हैं लेकिन चूँकि प्रवर समिति सदन की एक समिति है ऐसे में अगर समिति की कोई रिपोर्ट नहीं भी मिली थी तो भी सदन का संवैधानिक दायित्व था कि तीन माह के भीतर विधेयक के बारे में विचार कर सदन में कोई फैसला लेकर विधानसभा को अवगत कराया जाता। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिकं यह प्रक्रियात्मक त्रुटि है जिससे विधान सभा और विधानपरिषद की संवैधानिक शक्ितयों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।ड्ढr महाधिवक्ता ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 1बी) के तहत अगर कोई विधेयक एक बार विधानसभा में पारित होने के पश्चात विधानपरिषद को भेजा जाता है और विधानपरिषद द्वारा तीन महीने में उस पर कोई कार्रवाई न किए जाने की स्थिति में विधानसभा द्वारा उसे मूल रूप में पारित किया जाएगा। विधानसभा में दोबारा पारित होने के बाद पुन: उसे विधानपरिषद को भेजा जाएगा और एक माह बाद तदनुसार पारित माना जाएगा। सभापति चौधरी सुखराम सिंह चौधरी, शिक्षक दल के ओमप्रकाश शर्मा, नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन, राकेश सिंह राना, यज्ञ दत्त शर्मा, ख्वाजा हलीम, विशाल वर्मा समेत अन्य सदस्यों ने महाधिवक्ता से स्पष्टीकरण पूछे।

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