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जज बहाली मुद्दे ने मुशर्रफ की उड़ाई नींद

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के बीच जजों की बहाली को लेकर बनी सहमति ने राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने अपने करीबी सहयोगियों और संविधान विशेषज्ञों से मशविरा शुरू कर दिया है। इन जजों को मुशर्रफ सरकार ने इमरजेंसी के दौरान बर्खास्त कर दिया था। इनमें सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस इफ्तिखार चौधरी भी हैं जो मुशर्रफ के सेनाध्यक्ष पद पर रहते हुए राष्ट्रपति चुने जाने के मामले की सुनवाई कर रहे थे। चौधरी की बर्खास्तगी के बाद नवनियुक्त पंसदीदा जजों ने इस मामले में मुशर्रफ को हरी झंडी देते हुए उनका चुनाव वैध करार दिया था। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि बर्खास्त जज बहाली हो गए तो मुशर्रफ के खिलाफ मामला दोबारा खुल सकता है। पीपीपी के सहअध्यक्ष और पीएमएल-नवाज के प्रमुख नवाज शरीफ के बीच रविवार को हुई बैठक में इस फैसले पर अंतिम मुहर लगा दी गई थी कि नई सरकार के सत्ता संभालने के 30 दिन के भीतर एक प्रस्ताव पारित कर बर्खास्त जज बहाल कर दिए जाएंगे। इस फैसले से मुशर्रफ सांसत में हैं और उन्होंने सोमवार को रावलपिंडी स्थित अपने कैंप कार्यालय में आगे की रणनीति पर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख तारिक अजीज, अटर्नी जनरल मलिक कयूम और संविधान विशेषज्ञ शरीफुद्दीन पीरजादा समेत अपने खास सहयोगियों से सलाह-मशविरा किया। इस बैठक में मुल्क के ताजा राजनीतिक हालात पर भी चर्चा हुई और नेशनल असेंबली का अधिवेशन बुलाने के लिए एक निश्चित तारीख मुकर्रर करने पर भी विचार किया गया। फहीम और जरदारी के बीच बढ़े मतभेद: पीपीपी के वरिष्ठ नेता मखदूम अमीन फहीम ने कहा है कि वह अब भी प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं। फहीम ने पीटीवी को बताया कि मुर्ररी में हुई बैठक में लिए गए फैसलों के बावजूद उनकी उम्मीदवारी पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। इस बीच, फहीम और जरदारी के बीच गतिरोध बढ़ता जा रहा है। मुर्ररी में रविवार को पीएमएल-एन और पीपीपी के वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई अहम बैठक में फहीम को आमंत्रित नहीं किया गया था। जानकारों का कहना है कि जरदारी ने खुद ही कई नेताआें के नाम प्रधानमंत्री पद के लिए उछालकर फहीम के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मोहतरमा बेनजीर भुट्टो के कत्ल के बाद खुद जरदारी ने ही फहीम को प्रधानमंत्री पद का सबसे उपयुक्त उम्मीदवार बताया था।लेकिन चुनाव के नतीजे आने के बाद प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों की सूची बड़ी होती गई।

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