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परम आनंद का मार्ग है योग

गोपाल मैदान में योग विज्ञान शिविर के दूसरे दिन बाबा ने लोगों को कर्मशील बनने की सलाह देते हुए कहा कि खाली मन शैतान का होता है। इसीलिए हमेशा कर्मशील बने रहो। खाली मन में व्यर्थ की बातें आती हैं। ध्यान रखो कि एक क्षण के लिए भी प्रमाद न हो। उन्होंने सूत्र वाक्य देते हुए कहा कि जो दृश्यमान है, वह धोखा है। आनंद तो हमेशा अज्ञात में होता है। जिसे जान लिया उसमें क्या रस जो नहीं जाना उसकी प्राप्ति में रत रहो। अज्ञात में उतरो तभी जीवन का आनंद प्राप्त कर पाओगे। योग को पारिभाषित करते हुए बाबा ने कहा कि वर्तमान में जीना, सजग रहना, जागरूक रहना ही योग है। योग का अर्थ है अंत: ज्ञान से स्थूल शरीर को जोड़ लेना। योग परम आनंद का मार्ग है। बाबा ने कहा कि घृणा, द्वेष, अहंकार, क्रोध, पाप से बाहर निकलें और स्वधर्म, वात्सल्य, प्रेम और शांति मे प्रवेश करें। सुबह चार बज कर 4मिनट पर मंच पर आने के बाद बाबा का स्वागत सांसद सुमन महतो ने किया। उसके बाद बाबा ने अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, कपालभाति, शीतली, सीत्कारी, अर्ध मस्त्यासन, पश्चिमात्तान आसन, हलासन, चक्रासन, उत्तान आसन, नौकासन, पादांगुष्ठनासासन, पवन मुक्तासन, गो मुखासन, सूर्य भेद, चंद्र भेद, उज्जाई सहित बाबा ने कई आसन बताये जो स्पोंडोलाइटिस, डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर, ब्लड कैंसर, रक्तचाप, उदर रोग, महिलाओं के रोग, किडनी, थायरायड, सांस की शिकायत, हकलाना, एलर्जी आदि रोगों से निजात दिलाने में सक्षम हैं।

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