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उपयोगिता प्रमाणपत्र को लेकर बहस

विधानसभा में उपयोगिता प्रमाणपत्र और वित्त आयोग को लेकर जमकर बहस हुई। बहस में एक तरफ थे उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी तो दूसरी तरफ थे राजद के जगदानंद। जगदानंद का कहना था कि राज्य सरकार केन्द्र से मिले पैसों को व्यय के रूप में दिखा तो देती है लेकिन उसका लाभ जनता तक नहीं पहुंचता है। सरकार ने विभिन्न विभागों में संस्थाएं बना रखी हैं और उन्हें पैसा देकर वह इसे व्यय घोषित कर देती है।ड्ढr ड्ढr वे जानना चाहते थे कि सरकार ने कितना पैसा इन संस्थाआें को दिया है। श्री मोदी का कहना था कि भारत सरकार राशि किस्तों में विमुक्त करती है। पहले मिले पैसे का उपयोगिता प्रमाणपत्र भेजने पर ही अगली किस्त की राशि विमुक्त होती है। उन्होंने कहा कि जगदा बाबू भी सरकार में रहे हैं और वे जानते हैं कि उपयोगिता प्रमाणपत्र कैसे जाता है। इसके लिए इस सरकार ने कोई नई नीति नहीं बनाई है। उनके द्वारा व्यय की गई राशि का हिसाब देने पर जगदानंद ने कहा कि श्री मोदी उस पैसे का हिसाब दे रहे हैं जो केन्द्रीय करों से राज्यांश के रूप में बिहार को मिला है। इसके अलावा अत्यंत आवश्यक क्षेत्रों के लिए 12 वें वित्त आयोग ने 7 हजार करोड़ रुपये दिए हैं और श्री मोदी उसका हिसाब नहीं दे रहे हैं। उनका कहना था कि यदि सरकार ने इस मसले पर विधायकों को भरोसे में नहीं लिया तो आने वाले दिनों में उसे भारी संकट का सामना करना पड़ेगा। श्री मोदी का कहना था कि वित्त आयोग संवैधानिक निकाय है और वह तय फामरूला के अनुसार राज्यों को पैसा देता है। इसमें केन्द्र सरकार की कोई कृपा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केन्द्र सरकार से मिली किसी भी राशि को राज्य सरकार ने कहीं रोककर नहीं रखा है।

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