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13 अप्रैल, 2021|6:13|IST

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टाल क्षेत्र के विकास को विशेष योजना बनेगी

टाल क्षेत्र में जल जमाव की समस्या से निजात के लिए राज्य सरकार विशेष योजना तैयार करेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि टाल क्षेत्र की समस्या के निदान के लिए वर्ष 2003 में एक योजना बनायी गयी थी और वर्ष 2004 में उसपर काम भी शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि केन्द्र की योजना चल रही है। इसके साथ ही राज्य सरकार राज्य योजना से भी टाल क्षेत्र के विकास के लिए योजना बनाकर कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि टाल क्षेत्र से समय से पानी निकल जाए यही सबकी चिंता का विषय है। इसके लिए सरकार विशेष योजना तैयार करेगी। उन्होंने घोषणा की कि चालू सत्र में ही जल संसाधान मंत्री सदन को यह जानकारी देंगे कि टाल क्षेत्र के लिए राज्य सरकार के पास क्या योजनाएं हैं।ड्ढr ड्ढr इसके पहले कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह ने डॉ.महाचंद्र प्रसाद सिंह के तारांकित प्रश्न के जवाब में सदन को जानकारी दी कि टाल और दियारा क्षेत्र के लिए अलग से एक परियोजना पर विचार किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने सदन को यह भी जानकारी दी कि मोकामा टाल में चने की फसल में कीड़ा लगने की जांच करायी गयी है, लेकिन कहीं से इस तरह की रिपोर्ट सरकार को अब तक प्राप्त नहीं हुई है।ड्ढr ड्ढr वर्षा व बाढ़ से रबी फसल की बर्बादी का होगा सर्वे : मंत्रीड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। राज्य सरकार वर्षा और बाढ़ के कारण रबी फसल की बर्बादी का सर्वेक्षण कराएगी। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह ने सोमवार को विधान परिषद में मुंद्रिका सिंह यादव के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि नालंदा को छोड़कर किसी भी जिले से रबी फसल को हुई क्षति की सूचना प्रतिवेदित नहीं है। उन्होंने कहा कि आपदा के कारण 50 प्रतिशत फसल बर्बाद होने पर लघु और सीमांत किसानों को कृषि इनपुट सब्सिडी देने का प्रावधान है। उन्होंने सदस्यों को आश्वस्त किया कि जिलों में सर्वेक्षण के दौरान अगर 50 प्रतिशत फसलों की सूचना मिलेगी तो किसानों को नियमानुकूल सहायता दी जाएगी। उर्वरा-कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह ने विधान परिषद में यह घोषणा की कि बिहार में कृषि की उत्पादकता बढ़ी है। कहीं से भी सरकार को अब तक उर्वरता घटने की सूचना प्राप्त नहीं हुई है। प्रो.नवल किशोर यादव के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि भूमि की उर्वरा शक्ित घटने पर उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है, लेकिन राज्य में उत्पादकता बढ़ी है।ड्ढr ड्ढr वन्यप्राणियों से फसलों को बचाने पर गंभीरता से विचार होड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। किसानों और वन्य जीवों को लेकर राज्य सरकार की स्थिति एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई वाली हो गयी है। बिहार विधान परिषद में सोमवार को जब नीलगाय और जंगली सुअरों द्वारा फसलों की बर्बादी का मामला उठा तो सरकार को यह भी स्वीकार करना पड़ा कि इसका निदान अकेले राज्य सरकार के वश की बात नहीं है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन में घोषणा की कि राज्य सरकार इस मामले में केन्द्र सरकार से भी बात करेगी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सिर्फ वैशाली जिले के राघोपुर प्रखण्ड की ही नहीं बल्कि राज्य भर की है। इसके लिए राज्य सरकार, केन्द्र, जनता और वन्य प्राणी संरक्षकों को बैठकर विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि यह गेंद (बॉल) राज्य और केन्द्र सरकार के बीच फेंकते रहने से काम नहीं होगा। किसानों की हितों की रक्षा कैसे हो और वन्य प्राणियों से फसलों को कैसे बचाया जाए इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। इस मसले पर राज्य सरकार जल्द ही केन्द्र सरकार को पत्र लिखेगी। इसके पहले उदय नारायण राय के तारांकित प्रश्न के जवाब में पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री रामचंद्र सहनी ने घोषणा की कि जल्द ही नदियों के तटीय क्षेत्रों में सर्वेक्षण कराया जाएगा कि वन्य प्राणियों के कारण कितनी फसलें बर्बाद हो रही हैं। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि अभी तक कोई आधिकारिक सर्वेक्षण नहीं हो सका है। कार्यकारी सभापति प्रो.अरुण कुमार ने भी कहा कि यह समस्या बक्सर से लेकर भागलपुर तक की है।

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