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सरकार के निर्देश से अनभिज्ञ मंत्री बुरे फंसे

सरकार द्वारा दिए गए निर्देश से अनभिज्ञ होने के कारण मानव संसाधन विकास मंत्री वृशिण पटेल सोमवार को विधान परिषद में बुरे फंसे। विपक्ष ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए अधिकारियों पर सरकार को गुमराह करने का आरोप लगाया। बाद में कार्यकारी सभापति प्रो.अरुण कुमार ने कहा कि वर्ष 2005 में निर्गत निर्देंश संबंधी उक्त पत्र को विभागीय मंत्री को उपलब्ध करा दिया जाएगा जिसकी समीक्षा सरकार करे।ड्ढr ड्ढr श्री पटेल उपाचार्यों के वेतन से जुड़े भाजपा के डा. नरेन्द्र प्रसाद सिंह के एक ध्यानाकर्षण का जवाब दे रहे थे। डा. प्रसाद का कहना था कि सरकार के निर्देश पर उपाचायरे को पुनरीक्षित वेतनमान का भुगतान किया जा रहा है। अब विभाग इसे अनियमित मान रहा है, विश्वविद्यालय कटौती करने जा रहा है। मंत्री ने कहा कि सरकार के पास वह पत्र उपलब्ध नहीं है जिसमें पुनरीक्षित वेतन के भुगतान का आदेश है। जबतक इस संबंध में नीतिगत निर्णय लेकर आदेश जारी नहीं किया जाता तबतक नया वेतनमान उठाना अनियमित हैं। हालांकि मंत्री ने कहा कि जबतक समीक्षा नहीं कर ली जाती उपाचार्यों के वेतन से कटौती नहीं की जाएगी और सरकार पुनरीक्षित वेतनमान लागू करने संबंधी नीतिगत फैसला तुरंत ले लेगी। डा. नरेन्द्र प्रसाद सिंह ने सरकार के निर्देश संबंधी पत्र को कार्यकारी सभापति को उपलब्ध कराया तो राजद के डा. भी सिंह ने इसे गंभीर मामला बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे हैं जिससे सरकार को उत्तर देने में कठिनाई हो रही है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर हंगामा के मूड में आ ही रहा था कि कार्यकारी सभापति ने सरकार को समीक्षा का निर्देश दे दिया।ड्ढr ड्ढr एक सदस्य ने टाला विधान परिषद में ‘कोरम’ का खतराड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। सोमवार को एक समय विधानपरिषद में ‘कोरम’ का खतरा उत्पन्न होते-होते रह गया जब सदन में मात्र आठ सदस्य ही मौजूद थे। हालांकि एक सदस्य की गणना की वजह से यह खतरा टल गया, लेकिन स्थिति यह थी कि कोई सदस्य दूसरे सदस्य को बुलाने के लिए बाहर भी नहीं जा सकता था। ऐसी स्थिति में सदन में ‘कोरम’ का खतरा उत्पन्न हो जाता। इसी बीच यह बात बाहर पहुंची और सत्ता पक्ष के फिर दो-तीन सदस्य सदन में पहुंचे। उधर सत्ता पक्ष के सचेतक संजय कुमार सदस्यों को जुटाने के लिए बाहर भी दौड़े। उस समय स्थिति यह थी कि सभापति की कुर्सी के सामने वाले हिस्से में मात्र एक सदस्य बालेश्वर भारती ही मौजूद थे और वो भी बजट पर भाषण दे रहे थे। यह वह हिस्सा है जहां सदन के सर्वाधिक सदस्य बैठते हैं। विधानपरिषद में भोजनावकाश के बाद जब बजट पर सदस्य अपने-अपने विचार व्यक्त कर रहे थे कि तभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई जब मात्र आठ सदस्य ही रह गए थे। विपक्ष और सत्ता पक्ष के भी चार-चार सदस्य ही मौजूद थे। अलबत्ता नीतीश सरकार के आधे दर्जन मंत्री वहां अवश्य तैनात थे।ड्ढr ड्ढr राजद के डॉ. भीम सिंह ने ‘कोरम’ का सवाल उठाकर सदन को चौंका दिया। उनके सवाल उठाते ही सदस्यों ने एक -दूसरे को गिनना शुरू कर दिया। हालांकि सत्ता पक्ष के उपनेता गंगा प्रसाद ने इसका विरोध किया और कहा कि अभी वैसी स्थिति नहीं है। विधानपरिषद में सदस्यों की कुल संख्या 75 है। इस लिहाज से ‘कोरम’ के लिए आठ सदस्यों की ही जरूरत है।इस विवाद के बीच में सत्ता पक्ष के एक-एक कर दो सदस्य सदन में आ गए। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से परिषद में सदस्यों की उपस्थिति काफी कम दिख रही है। सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष की ओर भी यही संकट था।ं

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