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कैंपस डायरी : सवालों की मार, पड़े बीमार

सवालों की मार तो अच्छों-अच्छों को शांत कर देती है और वे तो कॉलेज के संचालक हैं। बेचारे उस दिन को कोस रहे हैं जब सरकार ने सूचना का अधिकार कानून लागू करने का निर्णय लिया था। हालांकि प्राचार्य महोदय बोलचाल में जितने ढीले-ढाले हैं, काम में भी उतने ही। इसका फायदा उनके मातहत शिक्षकों ने उठाना शुरू कर दिया है। सूचना के अधिकार के तहत शिक्षकों के एक समूह ने उन पर सवालों से प्रहार करना प्रारंभ कर दिया है। सवालों की ऐसी मार पड़ रही है कि बेचारे बराबर बीमार रहने लगे हैं। हद तो उस समय हो गयी जब इन लोगों ने प्राचार्य महोदय से दस साल पहले किस कंपनी का गंजी व जांघिया उपयोग करते थे उसके बारे में पूछ दिया।ड्ढr ड्ढr कमीज में जड़े सितारे दिख रहे बसंत के नजारेड्ढr बसंत की उमंग में तो बड़े और छोटे सभी तरंग में आ जाते हैं। इससे अछूता दरभंगा हाउस कैसे रहता। यहां पर चारो तरफ बसंती नजारा देखने को मिल रहा है। परीक्षा-परीक्षा के इस मौसम में बसंती रंग, समझ से परे लगता है न। अरे भाई हम छात्रों की बात नहीं करते वे तो हमारे मास्टर साहब हैं ना वही बसंतिया गए हैं। शनिवार को परीक्षा के दौरान एक शिक्षक को झिलमिलाती काली कमीज में देखकर तो छोटे निजाम की आंखें भी चौंधिया गयी। पूछे कौन हैं ये। तो उनको बताया गया सर इन्हें नहीं जानते वही कला प्रवीण की उपाधि प्राप्त सर हैं जो अपने छात्रों के बीच 11 हजार जोड़ी कमीज व सात हजार जोड़ी चप्पल रखने के लिए विख्यात हैं। छोटे निजाम मुस्कुराए और बोले चलो छात्र न सही शिक्षकों में तो बसंत का असर दिख रहा है।ड्ढr ड्ढr फुल टेंशन, नींद कैसे आएगीड्ढr आजकल विभागाध्यक्षों को रातों को नींद नहीं आ रही है। समाचार मिला है कि सभी फुल टेंशन में हैं। आप सोचेंगे कि आखिर क्या बात हो गयी कि सब तो ठीक चल रहा था। हां सही है कि सब ठीक चल रहा था। पर बुरा हो उस ऊंचे भवन का जिसको इनका कुर्सी प्रेम रास नहीं आया। घोषणा कर दी गयी कि अब रोटेशन प्रणाली के तहत विभागाध्यक्ष बनाए जाएंगे। इस घोषणा के बाद तो एक विभागाध्यक्ष खासे परेशान हैं। अरे उन्होंने इस कुर्सी को पाने के लिए जो जुगत लगायी है। अब फेल होती दिख रही है। अब कुर्सी खिसकते देख माथे पर पसीना नहीं आएगा तो क्या नींद आएगी।ड्ढr ड्ढr हम भी हैं जोश मेंड्ढr परीक्षार्थियों ने चैलेंज क्या कर दिया, विवि प्रशासन तो जोश में ही आ गया। कुछ परीक्षार्थियों ने जोश में कह दिया कि हमलोगों को नकल करने की छूट नहीं मिली तो हंगामा होगा। छात्रों के इस व्यवहार को अपमानजनक मानते हुए विवि प्रशासन ने भी अपना ताव दिखा दिया। हुआ यह कि प्रशासन के सहयोग से केंद्र पर एक छात्र पर एक सुरक्षाकर्मी की तैनाती कर दी गयी। प्रशासन के इस रूप को देखकर तो परीक्षार्थियों के होश उड़ गए। अब वे लोग परीक्षा में हंगामा भी नहीं कर सकते थे और पढ़ा नहीं था इस कारण कॉपी भी भर पाना मुश्किल हो रहा था। उनको तो न परीक्षा देते बन रहा था और न छोड़ते। और दिल के जो अरमां थे वे दिल में ही रह गए। इसके बाद छात्रों ने एक वरीय पदाधिकारी के बेटे के परीक्षा देने के बाद भी उनके द्वारा केंद्रों के निरीक्षण पर सवाल खड़ा कर दिया गया है। इसे कहते हैं नहले पर दहला।ड्ढr ड्ढr क्या करें क्या न करें मेरे भाईड्ढr पुराने निजाम में तो बड़ी पावंदी थी। छात्र से लेकर शिक्षक व अन्य कर्मचारियों को तो बराबर यह कहते सुना जाता है। पर स्थिति नहीं बदलते देख इन लोगों ने कहना शुरू कर दिया है यह निजाम भी अच्छा नहीं। पटना विवि में परीक्षाआें के कारण सभी की छुट्टियां रद्द कर दी गयी हैं। शिक्षक या कर्मचारी के छुट्टियों के आवेदन को सीधे लौटा दिया जाता है। इसको लेकर सभी आक्रोशित होने लगे हैं। एक कर्मचारी के घर में शादी थी और एक शिक्षक बीमार थे लेकिन दोनों के छुट्टी के आवेदन को रद्द कर दिया गया। इसके बाद तो उन्होंने बड़े साहब के सामने ही हंगामा शुरू कर दिया। अब बड़े साहब को नए निजाम के आदेशों को मानना है। उनकी स्थिति तो क्या करें क्या न करें वाली होकर रह गयी है।

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