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वाणिज्य मंत्री ने माना, निर्यात लक्ष्य रह सकता है पीछे

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ ने आखिर मान लिया कि 2007-08 के लिए निर्धारित 160 अरब डालर का निर्यात लक्ष्य हासिल नहीं भी हो सकता है। रुपये की मजबूती के कारण यह आशंका लंबे समय से व्यक्त की जा रही थी, लेकिन वाणिज्य मंत्री और वाणिज्य सचिव इस तथ्य को स्वीकार करने से बचने की कोशिश करते रहे थे। हालांकि यह एक सच्चाई है कि वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातकों को तमाम तरह की राहत सुलभ कराने के लिए लगातार दबाव बनाया और बहुत हद तक उन्हें रियायतें भी दिलाईं, लेकिन वित्त मंत्रालय की कोशिश इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम उठाने की रही है। उल्लेखनीय है कि रुपये में पिछले डेढ़ साल में लगभग 15 प्रतिशत की मजबूती आ चुकी है। केवल चालू वित्त वर्ष में इसमें 10 प्रतिशत से अधिक की मजबूती आ चुकी है जिसकी सबसे ज्यादा मार देश के निर्यातकों पर पड़ी है। कमलनाथ ने बताया कि अगले महीने घोषित की जाने वाली एफटीपी के सालाना पूरक में रुपये की मार से आहत निर्यातकों को राहत देने के लिए फिर से कोशिश की जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार ऐसे कदम उठाएगी जो विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) नियमों के अनुरूप हों। कमलनाथ ने बताया कि रुपये की मजबूती की मार सबसे ज्यादा ऐसे क्षेत्रों पर पड़ी है जो रोजगारपरक हैं। फियो सूत्रों के अनुसार, रूपए की तेजी से निर्यात क्षेत्र में 80 लाख रोजगार के अवसर हाथ से जाने का खतरा है। डालर के मुकाबले रूपए की मजबूती से निर्यात की रफ्तार गिर रही है और इससे इस क्षेत्र में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान रोजगार के 80 लाख अवसरों की हानि हो सकती है जिसमें नए रोजगार के 58 लाख अवसरों की हानि केवल कपड़ा निर्यात क्षेत्र में होगी। फियो अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता के अनुसार, ऐसा नहीं है कि रुपये की मजबूती पर देश के निर्यातकों को फ नहीं होता लेकिन इसके साथ साथ यह भी सच है कि रुपये में हुई इस निरंतर मजबूती ने देश के छोटे एवं मझोले उद्योग के निर्यात क्षेत्र की कमर तोड़ दी है जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी, कपड़ा आदि क्षेत्र शामिल हैं। इन लोगों की आय पहले से ही काफी कम है जिसपर रुपये की तेजी से वह और अधिक सिकुड़ गई है। रुपये की मजबूती से देश के निर्यातकों की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता में काफी कमी आ जाती है और निर्यात की तुलना में आयात आकर्षक हो जाता है।

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  • Web Title: निर्यात लक्ष्य रह सकता है पीछे : कमलनाथ