अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कलाई पर कड़े की लड़ाई में उतरी लंदन की सिख छात्रा

लाई में लोहे का कड़ा धारण करने पर स्कूल से निकाल दी गई भारतीय मूल की एक सिख छात्रा इस मामले में अदालती लड़ाई लड़ रही है। कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू होने तक उसे एक अन्य स्कूल में क्लास एटेंड करने की इजाजत दे दी गई है। 14 वर्षीय सारिका सिंह उस वक्त सुर्खियों में आई जब वेल्स स्थित अबेरडेयर गर्ल्स कांप्रीहेन्सिव स्कूल ने उसे निर्देश दिया कि वह स्कूल में कड़ा उतार कर आया करे क्योंकि कलाई पर कड़ा पहनने से स्कूल के ड्रेस कोड का उल्लंघन होता है। सारिका की मां कहना है कि धार्मिक कड़ा धारण करने की इजाजत न देकर स्कूल बालिका के मानवाधिकारों का हनन कर रहा है। देश के प्रमुख मानवाधिकार संगठन लिबर्टी ने इस मामले में सारिका को पूरा सपोर्ट किया है और वही सारिका का मुकदमा लड़ रहा है। अभी केस की सुनवाई शुरू नहीं हुई है और तब तक छात्रा को इलाके के ही एक अन्य स्कूल में पढ़ाई की इजाजत दे दी गई है। इस बीच क्षेत्र की सांसद ऐन क्लीवर्ड ने स्कूल के गवर्नर्स से अनुरोध किया है कि वे ऐसे मुकदमे पर पैसे की बर्बादी न करें। उन्होंने कहा कि सांसदों, सिख संगठन और लिबर्टी ने मुझे बताया है कि सारिका ही मुकदमा जीतेगी। जिस तरह सिख लड़कों को पगड़ी पहनने की इजाजत है, ऐसे में यह नहीं हो सकता कि सारिका के मामले में अदालत कोई और फैसला सुनाए। उन्होंने कहा कि वह समझ नहीं पा रही हैं कि स्कूल क्यों कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा रहा है।दरअसल सारिका 2005 में अपनी मां के साथ भारत आई थी। अमृतसर यात्रा के दौरान उसकी मां ने उसे सिखों के धार्मिक प्रतीकों के बारे में बताते हुए कड़ा धारण करवाया था। सारिका ने कहा कि उसने अपनी इस यात्रा के दौरान सिखों के प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा की और सिख धर्म और उसके इतिहास के प्रति उसके अंदर काफी दिलचस्पी बढ़ी। उसने कहा कि कड़ा उसे हमेशा यह याद दिलाता है कि वह सदैव अच्छा काम करे और साथ ही यह भी कि ईश्वर एक है। सारिका को इस बात का बहुत मलाल है कि उसके स्कूल ने उसकी भावनाआें को नजरअंदाज किया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: कड़े की लड़ाई में उतरी लंदन की सिख छात्रा