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अफगानिस्तान में आसान नहीं लोकतंत्र की राह : संरा.

संयुक्त राष्ट्र ने आखिरकार मान ही लिया कि अफगानिस्तान में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि आतंकवाद की जड़ें और गहरी होने के कारण इस देश में लोकतंत्र बहाली की राह आसान नहीं है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सुरक्षा परिषद को भेजी अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा कि अफगानिस्तान में आतंकवादियों की भारी तादाद और विस्फोटक पदार्थो व मादक द्रव्यों के व्यापक पैमाने पर उत्पादन जैसी समस्याआें की वजह से सामाजिक संस्थाएं इस कदर प्रभावित हुई हैं कि इनमें फिर से प्राण फूंकने की उम्मीद न के बराबर रह गई है। इस कारण से अफगानिस्तान में लोकतंत्र पर आधारित राजनीतिक व्यवस्था कायम करना दुरूह लक्ष्य बन गया है। न्यूयॉर्क में सोमवार को पेश की गई इस रिपोर्ट में बान ने लिखा है कि अफगानिस्तान में इस समस्या से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सेनाआें को हालांकि सफलता मिली है लेकिन इसके बावजूद सरकार विरोधी तत्वों का सफाया दूर की कौड़ी नजर आती है। रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान के 376 जिलों में से 36 जिले अभी भी अधिकारियों और राहतकर्मियों की पहुंच से पूरी तरह बाहर हैं। बान के अनुसार खराब मौसम, लचर प्रशासन और अशिक्षा तथा गरीबी के कारण मानवाधिकारों के प्रति लोगों का कम रुझान इस देश में विकास के रास्ते के सबसे बड़े बाधक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि निसंदेह यह लक्ष्य नामुमकिन नहीं है बल्कि अफगानिस्तान को फिर से सही रास्ते पर लाने के लिए इस काम में लगे सभी पक्षों को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है।ं

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  • Web Title: अफगानिस्तान में आसान नहीं लोकतंत्र की राह : संरा.