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स्मृति उपवन का नाम फिर बदला

वर्ण जयन्ती स्मृति उपवन का नाम फिर बदल दिया गया है। कांशीराम स्मृति उपवन के स्थान पर अब इसका नाम बौद्ध विहार शान्ति उपवन होगा। एलडीए बोर्ड की बैठक के इसकी जानकारी एलडीए उपाध्यक्ष राम बहादुर ने दी। हालाँकि बोर्ड बैठक के एजेण्डे में जो प्रस्ताव रखा उसमें नए नाम का कोई जिक्र नहीं किया गया था। उसमें सिर्फ कोर्ट के आदेश पर नाम बदलाव पर पुनर्विचार का लिखित प्रस्ताव लाया गया था।ड्ढr कई महीने पहले स्वर्ण जयन्ती स्मृति उपवन का नाम बदलकर कांशीराम स्मृति उपवन कर दिया गया था। इसे एलडीए बोर्ड और सरकार ने मंजूरी दे दी थी। इस पर अशोक यादव देव ने जनहित याचिका दायर की थी। पिछले दिनों कोर्ट में एलडीए ने यह पक्ष रखा था कि एक एकड़ जमीन पर कारगिल पुष्करिणी बनी है और 20 एकड़ में हरियाली है। इनका नाम भी स्मृति उपवन ही है। बाकी 80 एकड़ का ही नाम बदला गया है। लेकिन कोर्ट ने इस पर असहमति जताते हुए कहा था कि पूरा पार्क शहीदों की याद में बनाया गया था इसलिए सरकार इस नाम बदलाव पर पुनर्विचार करे। इस पर एलडीए बोर्ड की आपात बैठक मंगलवार को कांशीराम स्मृति उपवन के रूप में पार्क विकसित करने के निर्णय पर पुनर्विचार के लिए बुलाई गई थी। प्रस्ताव में नए किसी भी नाम का जिक्र नहीं था पर एलडीए अधिकारियों ने चर्चा के दौरान नया नाम बौद्ध विहार शान्ति उपवन करने का प्रस्ताव रखा। बोर्ड के पार्षद सदस्यों ने इस पर अपना विरोध भी दर्ज कराया। पार्षद गोविन्द पाण्डेय और राम कृष्ण यादव ने कहाकि यह पार्क शहीदों की याद में बना है। इससे लोगों की भावनाएँ जुड़ी हैं। नया नाम ही रखना है तो इतने खर्च में अलग से पार्क बनवाया जा सकता है। बाद में एलडीए उपाध्यक्ष ने पत्रकार वार्ता में बताया कि बोर्ड सदस्यों की सहमति से पार्क का नाम बौद्ध विहार शान्ति उपवन कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि अम्बेडकर स्मारक की 75 एकड़ जमीन में सिर्फ 22 एकड़ का भूउपयोग ही सामाजिक, सांस्कृतिक, शोध संस्थाएँ एवं सेवाएँ किया गया है। इससे पहले बैठक में 35 एकड़ जमीन का यह भूउपयोग बताया गया था। इसी तरह पार्क, क्रीड़ा स्थल, के लिए अब यहाँ 53 एकड़ जमीन होगी जो पहले सिर्फ 40 एकड़ तय की गई थी।

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