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बैल की जगह जोते जा रहे हैं आदिवासी

राज्य के पिछले जिलों में आने वाले किशनगंज में बैल के बदले अब गरीबों को ही जोता जाता है। 60 रुपये में आराम से मजदूर मिल जाते हैं जो दिन भर खेतों में हल को कंधे पर रखकर खींचते हैं। जिले के ठाकुरगंज प्रखंड कार्यलय के समीप बीडीआे आवास के पीछे यह सब हो रहा है। जमीन मालिक से जब इस संबंध में पूछा जाता है तो वह बड़े गर्व से कहता है कि 60 रुपये मजदूरी के साथ एक समय का भोजन भी दिया जाता है। हालांकि इस संबंध में जब जिलाधिकारी से बात की गयी तो उन्होंने बीडीआे को जांच का आदेश दिया। डीएम ने कहा कि जमीन मालिक पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।ड्ढr ड्ढr सोमवार को जब यह संवाददाता ठाकुरगंज पहुंचा तो बीडीआे आवास के पीछे खेत में बैल की जगह गरीब आदिवासी सुफल मरांडी व मंजला हांसदा, हलवाहा राजेंद्र राजभर जुताई में लगे५थे। वहीं पास में ही जमीन मालिक अशोक लाहिड़ी कुर्सी लगाकर बैठे थे। खेत जोतने के लिए बैल बने दोनों आदिवासी सुफल मरांडी तथा मंजला हांसदा ने बताया कि उन्हें खेत जुताई के लिए 60 रुपये मिलता है। पास में कुर्सी पर बैठे जमीन मालिक आलोक कुमार लाहिड़ी ने बताया कि दोपहर एक समय का खाना भी दिया जाता है। श्री लाहिड़ी से जब यह पूछा गया कि जो कार्य वह कर रहे हैं वह गैरकानूनी है तो उन्होंने कहा कि हल्का मिट्टी होने के कारण आदमी से जुताई करा रहे हैं।

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