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विप में सरकार को झटकामतविभाजन में हुई हार

विधानपरिषद में राज्य सरकार को बुधवार को उस समय करारा झटका लगा जब सत्ता पक्ष के अल्पमत में होने के कारण उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (यूपीकोका) 2007 विधेयक विचार के लिए स्वीकार ही नहीं किया जा सका। जबकि उत्तर प्रदेश सार्वजनिक भू-गृहादि (अप्राधिकृत अध्यासियों की बेदखली) संशोधन विधेयक 2007 दोबारा प्रवर समिति को भेज दिया गया। दोनों ही मामलों में हुए मतविभाजन में सरकार को पराजय का मुँह देखना पड़ा।ड्ढr यूपीकोका विधेयक को विचार के लिए स्वीकार करने का प्रस्ताव मतविभाजन में 14 के मुकाबले 25 मतों से नामंजूर हो गया। कांग्रेस इस मामले में तटस्थ रही जबकि निर्दलीय एसपीसिंह ने सरकार के पक्ष में मतदान किया। इससे पहले सपा, रालोद और भाजपा ने विधानपरिषद द्वारा यूपीकोका विधेयक को दोबारा प्रवर समिति को भेजे जाने के बावजूद विधानसभा में पारित कर देने और इस कानून के बेजा इस्तेमाल से संबंधित तमाम सवाल उठाए गए।ड्ढr दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सार्वजनिक भू-गृहादि (अप्राधिकृत अध्यासियों की बेदखली) संशोधन विधेयक 2007 को दोबारा प्रवर समिति को भेजे जाने का प्रस्ताव 13 के मुकाबले 24 मतों से पारित हुआ। इस विधेयक को लेकर विपक्षी दलों की आपत्ति थी कि इसे 1से लागू करने की सरकार की मंशा ठीक नहीं। वह राजनीतिक दलों के कार्यालय खाली करवाएगी। संसदीय कार्यमंत्री लालजी वर्मा ने इसे दोबारा प्रवर समिति को भेजे जाने का विरोध किया। उनका कहना था कि किन नियमों के तहत इसे दोबारा प्रवर समिति को भेजे जाने का प्रस्ताव रखा जा रहा है? क्योंकि दो बार विधानसभा में पारित विधेयक को दोबारा प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव किया ही नहीं जा सकता। ड्ढr उधर, जानकारों के मुताबिक विधानसभा से दोबारा मूल रूप में पारित यूपीकोका विधेयक को विधानपरिषद ने विचार के लिए भले ही नामंजूर किया हो लेकिन फिर भी इसे अब राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे जाने में कोई अड़चन नहीं रही। विधानसभा से इसे पहले ही दोबारा पारित कर चुकी है। तय समय सीमा के बाद यह विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है। जानकारों के मुताबिक-इसी तरह उत्तर प्रदेश सार्वजनिक भू-गृहादि (अप्राधिकृत अध्यासियों की बेदखली) संशोधन विधेयक 2007 को दोबारा प्रवर समिति में भेजे जाने से भी यह विधेयक के भी महज कुछ दिन तकनीकी रूप से कानून बनने की प्रक्रिया स्थगित रहेगी। क्योंकि विधानसभा इसे भी दोबारा पारित कर चुकी है।

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