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तीन मिनट से ज्यादा बोले तो माइक बंद

राज्यसभा में शून्य काल के दौरान मुद्दा उठाने वाले सांसद को अब पूरे तीन मिनट मिलेंगे। लेकिन तयशुदा वक्त के बाद बोलने वालों को निराश होना पड़ेगा। उनका माइक अपने आप बंद हो जाएगा और दूसरे सांसद को बोलने का मौका मिल जाएगा। सामने लगी इलेक्ट्रानिक पट्टिका पर बोलने का अगला मौका पाने वाले सांसद का नाम भी आएगा। सदन में यह नई व्यवस्था बुधवार से ही लागू हो गई। समय की बरबादी रोकने और ज्यादा विषयों पर ज्यादा सांसदों को वक्त देने के मकसद से यह व्यवस्था लाई गई। सभी राजनैतिक दलों के नेताओं से मशविरे के बाद सभापति हामिद अंसारी ने इसे लागू करने का फैसला किया। लेकिन भाजपा के कुछ सदस्यों ने पहले ही दिन इस व्यवस्था के लागू करने में अडं़गा लगाया। सदन में उपसभापति रहमान खां ने बुधवार को शून्य काल के दौरान सपा के अमर सिंह को अपना मुद्दा उठाने की इजाजत दी। लेकिन सिंह का नाम पुकारे जाने के साथ ही भाजपा के कई सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर बोलने की इजाजत मांगने लगे। वेंकैया नायडू को केरल के बारे में कुछ क हते सुना गया। पर शोरशराबे में किसी की पूरी बात नहीं सुनाई पड़ रही थी।ड्ढr नई व्यवस्था के अनुसार सदस्यों द्वारा हर दिन कुल 10 मुद्दों को उठाने की इजाजत होगी। हर सदस्य को तीन-तीन मिनट मिलेंगे। हर हफ्ते कम से कम ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लेने की कोशिश की जाएगी। प्रश्नोत्तर काल के लिए कुछ व्यवस्था तय की गई है। मसलन, हर सदस्य को अपने मूल सवाल पर सिर्फ दो पूरक पूछने का मौका मिलेगा। सवाल पूछने का मौका भी बारी-बारी से मिलेगा। एक हफ्ते में एक ही सदस्य कई सवाल नहीं पूछ सकेंगे।

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