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सूबे में नहीं रखा जाता मृत बंदियों का रिकॉर्ड

सूबे के जेलों में न केवल माल-मवेशी की तरह कैदियों को ठूंसकर रखा जाता है, बल्कि मरने पर भी उनसे जानवरों सरीखा व्यवहार किया जाता है। बंदियों की मौत को रूटीन मानकर उनके बारे में कोई रेकॉर्ड नहीं रखा जाता। मसलन उनकी मौत किस वजह से हुई।ड्ढr ड्ढr स्वास्थ्य, जिला एवं जेल प्रशासन मृत कैदियों के बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की रस्म अदायगी करता है। बंदियों के मृत्यु की विधिवत सूचना नहीं मिलने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कड़ी नाराजगी जतायी है। आयोग ने माना है कि वैसे तो सभी जिले इस मामले में लापरवाह हैं, पर मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, वैशाली की स्थिति अधिक खराब है। अब तक 250 मामले हैं जिनकी रिपोर्ट समय पर नहीं दी जा सकी है। इसका खुलासा कारा महानिरीक्षक संदीप पौण्डरिक की रिपोर्ट से हुआ है। श्री पौण्डरिक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मानवाधिकार आयोग समय-समय पर इस बारे में शिकायत कर रहा है। लेकिन जिलास्तर पर संबंधित विभागों के अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। कारा महानिरीक्षक ने पत्र (संख्या भेजकर जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को विशेष पहल करने को कहा है। उन्होंने पत्र में आयोग की आपत्ति और शिकायतों का हवाला दिया है। इधर, जिले में श्री पौण्डरिक का कड़ा पत्र आने से संबंधित अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। सिविल सर्जन डॉ. धर्मदेव सिंह ने बताया कि वैसे तो उनके कार्यकाल में मृत बंदियों का मामला नहीं आया है। लेकिन कारा महानिरीक्षक के निर्देश पर विधिवत रिपोर्ट आयोग को भेजी जाएगी। महानिरीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार मृत कैदियों का दंडाधिकारी जांच प्रतिवेदन भी नहीं दिया गया है। इसके स्थान पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट भेज दी जाती है, जबकि दोनों प्रतिवेदन में काफी अंतर है। जांच प्रतिवेदन नहीं मिलने से कानूनी प्रक्रिया की पेचिदगी बढ़ जाती है। इसी तरह सीधे मृत बंदियों की बेसरा रिपोर्ट भेज दी जाती है, लेकिन उसमें मौत के अंतिम कारण की चर्चा नहीं होती है। लिहाजा उसे बेसरा रिपोर्ट का मतलब नहीं रह जाता है। सीआईडी की टीम ने जेल में शहाबुद्दीन से पूछताछ कीड्ढr सीवान (सी.का.)। अपराध अनुसंधान विभाग की टीम ने एक हत्या के मामले में जेल के अंदर जाकर राजद सांसद मो. शहाबुद्दीन से पूछताछ की। टीम ने लगभग 40 मिनट तक शहाबुद्दीन से कई बिन्दुआें पर पूछा। हालांकि पपौर गांव निवासी योगेन्द्र पांडेय हत्याकांड में पुलिस ने बहुत पहले फाइनल प्रतिवेदन सौंप दिया था। फिर इस मामले को सीआईडी ने टेकअप कर लिया। यह मामला फिर से खुल गया। 13.7.ो द्विवेदी पेट्रोल पंप पर अपराधियों ने योगेन्द्र पांडेय नामक व्यक्ित की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अपराध अनुसंधान विभाग के पुलिस उपाधीक्षक विजय कुमार, इंस्पेक्टर अवधेश सिंह तथा सहायक दारोगा रसीद खां के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम बुधवार को सीवान पहुंची तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी से अनुमति लेकर 4 बजे जेल में गई। लगभग 40 मिनट टीम शहाबुद्दीन से कई बिन्दुआें पर पूछताछ कर लौट गई।

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