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बाल ठाकरे को नोटिस

शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को लोकसभा सचिवालय की आेर से विशेषाधिकार हनन से संबंधित मामले में बुधवार को नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस उन्हें अपनी पार्टी के मुख्यपत्र ‘सामना’ के सम्पादकीय में बिहार के सांसदों जिनमें रेलमंत्री तथा राजद प्रमुख लालू प्रसाद भी शामिल हैं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए दिया गया है। इसी मामले में सामना के सम्पादक संजय राउत को भी नोटिस जारी कर उनके विरुद्ध दिए गए विशेषाधिकार हनन के नोटिस पर स्पष्टीकरण मांगा है।ड्ढr ड्ढr श्री ठाकरे व राउत को भेजे गए नोटिस की पुष्टि शिवसेना सूत्रों ने भी की है। शिवसेना के महासचिव संजय राउत ने कहा है कि वे सामना के सम्पादकीय पर अडिग है और नोटिस से विचलित नहीं है। मराठी व महाराष्ट्र की अस्मिता के लिए शिवसेना कुछ भी करने को तैयार है। मालूम हो कि राजद के सांसद देवेन्द्र प्रसाद यादव और बिहार व उत्तरप्रदेश के अन्य सांसदों ने विगत 5 मार्च को ही सांसदों व संसद को अपमानित करने व नीचा दिखाने वाली बाल ठाकरे की टिप्पणी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था। लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने भी इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि शिवसेना प्रमुख की टिप्पणियों सेसंसद की अवमानना होती है। उन्होंने श्री यादव से कहा कि प्रक्रियाएं अपनाई जा रही है और इस संबंध में कार्रवाई की जाएगी। ठाकरे ने सम्पादकीय में कहा था कि वे (बिहारी) दक्षिण भारत,असम और पंजाब तथा चंडीगढ़ नहीं जाते हैं। बिहारी जहां भी जाकर बसते हैं उन्हें वहां की स्थानीय जनता पसंद नहीं करती है।ड्ढr ड्ढr दूसरी आेर उत्तरप्रदेश व बिहार के सांसद संसद में मुम्बई और महाराष्ट्र को लेकर अपनी मराठी विरोधी मानसिकता और अभद्रता का प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा सम्पादकीय में बिहार के महराजगंज के सांसद प्रभुनाथ सिंह को ‘हत्यारा’ कहा गया और उनकी जगह संसद में नहीं जेल में बताया गया। रेलमंत्री लालू प्रसाद के बारे में भी टिप्पणी की गयी थी कि उन्होंने तो बिहार को नारकीय बना ही दिया है और अब उन्हें मुम्बई और महाराष्ट्र को राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सूत्रों के अनुसार लोकसभा विशेषाधिकार समिति, जिसके अध्यक्ष किशोर चंद्र देव है,ठाकरे के जवाब के अध्ययन के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी।ड्ढr ड्ढr दूसरी आेर ‘एक बिहारी सौ बीमारी’ के संपादकीय पर शिवसेना अडिग है। शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के खिलाफ लोकसभा सचिवालय की आेर से विशेषाधिकार हनन के बारे में मांगे गए स्पष्टीकरण से विचलित हुए बिना पार्टी ने बुधवार को कहा कि वह मराठी मानुष की अस्मिता और हितों की रक्षा की खातिर अपना अभियान जारी रखेगी। शिवसेना के महासचिव सांसद संजय राऊत ने संवाददाताआें से कहा कि अभी तक लोकसभा सचिवालय की आेर से उन्हे कोई लिखित सूचना प्राप्त नही हुई और मिलने के बाद उसका उचित जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पांच मार्च 2008 को पार्टी के मुखपत्र दैनिक सामना में ‘एक बिहारी सौ बीमारी’ शीर्षक से लिखे संपादकीय के विचारों पर पूरी तरह अडिग है और हमारे विचारों में कोई भी बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा में जनता दल यू. के सांसद प्रभुनाथ सिंह ने जब महाराष्ट्र के बारे में जो बात कही उससे महाराष्ट्र की मराठी जनता का घोर अपमान हुआ है और उसका विरोध राय के 48 सांसदों को उसी समय करना चाहिए था लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नही हुआ तो शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ ने अपने संपादकीय के माध्यम से किया है। श्री राऊत ने कहा कि शिवसेना महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता और हितों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है और आगे भविष्य में इसके लिए फांसी पर भी जाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि राजनीति और पत्रकारिता के जीवन में इस तरह का नोटिस शिवसेना और उनके लिए कोई नई बात नही है और इससे हम जरा भी विचलित नही होंगे।

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  • Web Title: बाल ठाकरे को नोटिस