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जेलों की क्षमता पर संख्या हावी

बिहार की जेलों की ‘क्षमता’ पर ‘संख्या’ हावी है। ‘संख्या’ यानी कक्षों और सेलों की औकात से ज्यादा रखे गए हैं बंदी। बिहार में अधिसंख्य जेलों की वर्षो से यही स्थिति है। सीधे तौर पर कहें तो वहां कैदियों की सेहत बिगड़ने का पूरा इंतजाम रहा है। क्षमता और संख्या का यह खेल आज भी जारी है। हालांकि अपवाद के तौर पर कुछ ऐसी भी जेलें हैं जहां ‘संख्या’ पर ‘क्षमता’ भारी है। बात सेल की हो, भोजन की हो या फिर चिकित्सकीय सुविधाओं की। एक बार जेल में बंद हो गए तो फिर बुनियादी सुविधाएं सपने बन जाती हैं। बिहार में छह केन्द्रीय कारा, 33 जिला कारा और 15 उप कारा हैं। आए दिन कैदियों द्वारा आत्महत्या का प्रयास, आपसी झड़प और फरारी की कोशिशें वहां की परेशानियों को और पुष्ट करती हैं।ड्ढr ड्ढr जेलों के जर्जर हालात का एक बड़ा कारण बड़ी संख्या में जेलकर्मियों की रिक्ितयां भी हैं। सरकार भी मानती है कि जेलों में शौचालय से लेकर पेयजल और कैदियों को समुचित भोजन देने की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। जेलों की क्षमता पर निगाह डालें तो स्थिति और स्पष्ट होगी। केन्द्रीय कारा बक्सर, गया, बेउर, मुजफ्फरपुर, भागलपुर (दो) में पुरुष और स्त्री बंदियों की कुल क्षमता 11447 है जबकि रखे जा रहे हैं 114महिलाएं) बंदी। जिला काराओं की क्षमता 15017 की है और रखे जा रहे हैं 24450 बंदी। यानी क्षमता से करीब 10 हजार अधिक बंदी ठूंसे गए हैं वहां। उप काराओं में 3134 बंदियों की क्षमता है लेकिन वहां भी 3बंदी हैं। कुल 54 जेलों की क्षमता 2बंदियों की है, लेकिन वहां अभी करीब 40 हजार बंदी हैं। यानी क्षमता से दस हजार अधिक। गत वर्ष तक क्षमता से करीब 15 हजार अधिक कैदी विभिन्न जेलों में बंद थे। हालांकि दलसिंहसराय, बिक्रमगंज, बेनीपुर, नवगछिया और रोसड़ा उपकारा और केन्द्रीय कारा बक्सर,भागलपुर अपवाद ही हैं जहां क्षमता से कम बंदी हैं। कारा विभाग के अधिकारियों के अनुसार सजायाफ्ता बंदियों को छोड़ दें तो अन्य कैदियों की क्षमता घटती-बढ़ती रहती है। जेलों में बढ़ती परेशानियों और कर्मियों की रिक्ितयों को अब सरकार भी महसूस कर रही है।ड्ढr ड्ढr सरकार का दावा है कि कारागार सुधार योजना के तहत नए सेलों के निर्माण के जरिए जेलों की क्षमता का विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत गोपालगंज, जमुई तथा जहानाबाद में प्रमंडलीय जेल और बेनीपट्टी तथा दाउदनगर में अनुमंडल काराओं का निर्माण किया जा रहा है। सरकार कहती है कि इन योजनाओं के पूरा होने से 27 हजार अतिरिक्त बंदियों को रखा जा सकेगा। जेलों में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर 60 लाख खर्च कर 1200 शौचालयों का जीर्णोद्धार, 1233 नए शौचालयों का निर्माण और 00 चापाकल लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 50 आधुनिक रसोईघर बनाने की भी योजना है। हालांकि जेल आईजी संदीप पौंडरीक ने पूछने पर बताया कि योजनाएं अगले दो-तीन वर्षो में पूरी होंगी। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के पूरा होने के बाद जेलों में स्थितियां और सुविधाएं दोनों ही बेहतर होंगी।ं

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