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राजरंग

जिले में शिक्षा की व्यवस्था की देखरेख करनेवाले जनाब की व्यस्तता इन दिनों बढ़ गयी है। जबसे बच्चों को पढ़ाने-लिखाने का भार संभालनेवाले वजीर की नजरे इनायत साहब पर हुई, तबसे उनके चरण जमीन पर नहीं हैं। सम्राट अशोक नामधारी जनाब की सुबह-शाम इन दिनों वजीर के निवास पर ही गुजरती है। शर्माहट भी उनमें है। वजीर साहब भी उनकी भक्ित से प्रसन्न रहते हैं। वजीर की खातिरदारी में उनका अधिकतर वक्त निकल जा रहा है। सुबह मॉर्निग वाक करते हुए वह वजीर के आवास में पहुंच जाते हैं। वजीर साहब के कार्यक्रम के अनुसार ही इनकी दिनचर्या तय होती है। शिक्षा महकमे में भी खूब चर्चा का विषय है कि वजीर को खुश करना है, तो साहब को पकड़िये। वजीर साहब कुछ दिनों पूर्व जब एक मास्टर साहेब को भगाने के मामले में विवाद में पड़ गये थे, तो साहब रातो रात लौहनगरी पहुंच कर मास्टर साहेब को साथ लेकर वजीर के दरबार में हाजिर हो गये और मामला सलट गया। वजीर को कैच करने में इन्हें महारत हासिल है, चाहे किसी की सरकार रहे। अपनी इसी कारीगरी के कारण साहेब जहां, जितने जितने दिनों तक चाहते हैं, टिके रहते हैं। राजधानी में भी तीन साल से कुर्सी की शोभा बढ़ा रहे हैं।ं

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