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पंचायत चुनाव से लगेगा भ्रष्टाचार पर अंकुश

देश भर में झारखंड एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां एक बार भी ग्राम पंचायत का चुनाव नहीं हुआ है। राज्य के लगभग 53 प्रतिशत ब्लॉक (212 में से 112) अनुसूचित क्षेत्र में आते हैं। इन क्षेत्रों में पेसा कानून के प्रावधान लागू हैं, लेकिन इन अनुसूचित इलाकों में ऐसे भी गांव हैं जहां आदिवासी आबादी महज 10 से 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है, लेकिन पेसा कानून के तहत आधे से ज्यादा वार्ड आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं। राज्य के 112 ब्लॉकों और उनके भीतर आनेवाले ग्राम पंयायतों में गैर आदिवासी नागरिक ग्राम-पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद् या मुखिया नहीं बन सकते। झारखंड में ऐसी भ्रामक स्थितियों का जाल है। उक्त बातें मधुपुर लोक जागृति केंद्र के निदेशक अरविंद कुमार ने कहीं। वे गुरुवार को होटल ग्रीन होरिजोन में झारखंड में पंचायत के अस्तित्व पर राज्यस्तरीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।ड्ढr सेमिनार में स्टेट इलेक्शन कमिश्नर एमके मंडल ने कहा कि जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में है, वे इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर नहीं कर सकते, लेकिन इतना जरूर कहा कि मामले का निबटारा होने पर सारी स्थितियां साकारात्मक हो सकती हैं। मंडल ने कहा कि न्यायालय के आदेशानुसार पंचायत चुनाव के कुछ प्रावधानों पर राज्य सरकार फैसला ले सकती है। इस दिशा में वे जल्द की सरकार का ध्यान आकृष्ट करायेंगे।ड्ढr रांची विश्वविद्यालय के डॉ रमेश शरण ने कहा कि भ्रष्टाचार पर अंकुश तभी लगाया जा सकता है, जब पंयायतों को अधिकार दिये जाये। अकुशलता और अकर्मण्यता को केवल तभी दूर किया जा सकता है, जब स्थानीय स्तर पर अपने विकास का जिम्मा खुद आम आदमी को सौंप दिया जाये। प्रिया संस्था की नलिनी उपाध्याय ने कहा कि झारखंड सरकार से सबकी आशा जगी है। सेमिनार को प्रिया के राजपाल, शेखर, रश्मि कत्यायन ने संबोधित किया।

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