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कर्ज माफी पर राहुल ने सरकार को सराहा

किसानों की कर्ज माफी पर सरकार की पीठ थपथपाने की कमान गुरुवार को कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने धमाकेदार ढंग से निभाई। लोकसभा में आम बजट में चर्चा में भाग लेते हुए राहुल गांधी ने कर्ज माफी के लिए दो हेक्टेयर जमीन की सीमा को खत्म करने और कटऑफ तिथि को पिछले साल मार्च माह तय करने की मांग की। राहुल जब बजट पर बोल रहे थे तो कांग्रेस सांसदों में उनके भाषण पर बार-बार मेजें थपथपाने की होड़ लगी थी। जबकि विपक्ष की आेर से लिखा भाषण पढ़ने के लिए कुछ मौकों पर टोकाटाकी हुई। अपनी मां सोनिया गांधी की मौजूदगी में राहुल गांधी ने देश के कई हिस्सों में सूखा व प्राकृतिक आपदाआें खासतौर पर विदर्भ जैसे इलाकों में संकटग्रस्त किसानों का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। उनका कहना था किकई हिस्सों में फसल की मियाद की वजह से कर्ज माफी की कटऑफ की तारीख में फेरबदल जरूरी है। एसपीजी से क्यों पूछूं : राहुल गांधी ने हाल की उड़ीसा यात्रा के दौरान सुरक्षा नियम तोड़ने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उन्हें जनता से मिलने के लिए एसपीजी अथवा पुलिस से इजाजत लेने की कोई जरूरत नहीं है। लोकसभा में बीजद के सदस्य बृजकिशोर त्रिपाठी द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के बाबत राहुल ने पत्रकारों से कहा, मैं सुरक्षा संबंधी तकाजों को बेहतर समझता हूं। मेरा मकसद ही यही था कि नेता और जनता के बीच का फासला मिटना चाहिए। दरअसल त्रिपाठी का कहना था कि उड़ीसा यात्रा के दौरान 7 मार्च की रात राहुल जेड-प्लस सुरक्षा को धता बताकर और पुलिस को बिना बताए गेस्टहाउस से निकलकर नक्सल प्रभावित कोरापुट में किसी अज्ञात स्थान पर जा पहुंचे।

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