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बच्चों को जुआरी बना रहे ‘कैरम क्लब’

सआदतगंज निवासी आठवीं कक्षा के छात्र सदफ (सभी नाम बदले हुए हैं) को माँ ने घर का सामान लेने भेजा लेकिन घर आकर उसने बताया कि कोई लड़का उसके हाथ से रुपए छीनकर भाग गया। बाद में पता चला कि साहबजादे कैरम क्लब में शर्त लगाकर रुपए हारकर चले आए। पाटा नाला निवासी 12 वर्षीय आमिर को कैरम का शौक था इसलिए पापा ने घर में कैरम लाकर दे दिया फिर भी उसे जब मौका मिलता है तो चोरी-छिपे वह क्लब पहँुच जाता है। वजह साफ है यह क्लब बच्चों को जुए का लती बना रहे हैं इससे बच्चे घर में झूठ तो बोलते ही हैं कई बच्चे तो अपने ही घर में चोरी तक करके जुआ खेलने जाते हैं।ड्ढr सआदतगंज, चौक, आगामीर डय़ोढ़ी, अमीनाबाद, ठाकुरगंज व खदरा जैसे इलाकों में इन कैरम क्लबों की भरमार है। यह क्लब संकरी गलियों में खोले गए हैं। क्लब के बाहर कोई बोर्ड बैनर भी नहीं लगाया जाता जिससे इनकी पहचान की जा सके। यहाँ वयस्क जुआरियों का जमावड़ा तो रहता ही है स्कूली बच्चे भी इनकी संगत में बर्बाद हो रहे हैं। जबकि अधिकतर क्लब मालिक यहाँ जुआ खेले जाने की बात से इनकार करते हैं। इनका कहना है कि गेम खेलने के लिए चार-से पाँच रुपए ही यह ग्राहक से लेते हैं। खदरे के क्लब मालिक सफदर ने जुआ खेले जान की बात को स्वीकारा भी है। उससे पूछा गया कि क्या पुलिस इस पर कोई कार्रवाई नहीं करती तो उसने कहा कि पुलिस वाले इसके लिए पाँच से छह सौ रुपए महीने की वसूली करते हैं। कैरम क्लब के पंजीकरण के लिए अलग से कोई नियमावली न होने के कारण यह धंधा फल-फूल रहा है। क्षेत्रीय कार्यालय ‘फर्म्स सोसायटी एवं चिट्स’ से सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1860 के अन्तर्गत ही कैरम क्लबों का पंजीकरण भी 1000 रुपए शुल्क चुकाकर आसानी से हो जाता है। दलालों को पैसा खिलाया जाए तो दो से चार दिन में ही क्लब मालिक बना जा सकता है। डिप्टी रजिस्ट्रार उमा शंकर सिंह से शहर में क्लबों की संख्या पूछी गई तो उन्हे इसकी जानकारी ही नहीं थी। श्री सिंह ने बताया कि अगर क्लब के खिलाफ गलत गतिविधियों के लिए एफआाईआर दर्ज करवा दी जाए तब भी इनका पंजीकरण जब तक रद नहीं किया जा सकता जब तक न्यायालय का आदेश न हो।

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