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रातोरात नहीं बनते टैरोकार्ड रीडर

टैरोकार्ड रीडर पूनम सेठी का मानना है कि टैरो रीडर रातोरात नहीं बनते, न ही यह सिखाया जा सकता है। यह अंकशास्त्र, चित्र और पूर्वाभास का मिलाजुला स्वरूप है। लगातार स्वाध्याय, साधना और अनुभव के साथ ईश्वरीय कृपा से ही यह संभव है। श्रीमती सेठी गुरुवार को होटल ताज में पत्र प्रतिनिधियों से मुखातिब थीं।ड्ढr पूनम सेठी ने बताया कि वह 18 साल से इस विधा की साधना कर रही हैं। इस दौरान अनेक बड़े व्यवसायी, राजनेता, फिल्म स्टार उनकी कंसल्टेंसी लेते हैं लेकिन उन्हें सर्वाधिक सुख आम आदमी की दिक्कतों को सुलझाने में मिलता है। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि फिल्मी सितारों की निजी जिंदगी बहुत तंग है। कुछ तो निजी जिन्दगी में बेहद निराशावादी हैं। अक्सर उनके सवाल इसी संदर्भ में होते हैं। उन्होंने बताया मिस्र् में तीन हजार साल पहले पनपी भविष्य जानने की यह विधा हाल में भारत में काफी लोकप्रिय हुई है और इस क्षेत्र में अधिकतर महिलाएँ इसलिए आ रही हैं क्योंकि उनके अंदर पूर्वाभासी क्षमता, सहनशीलता और दूसरों की तकलीफें खुद में जज्ब कर लेने की क्षमता अधिक होती है। इस विधा के जरिए भविष्य बताने से पहले स्वाध्याय, अभ्यास और एकाग्रता बहुत जरूरी है। उन्होंने अपने बारे में बताया कि वह पहले शिव जी की भक्त थीं लेकिन शादी के बाद जीवन में कुछ ऐसे चमत्कार हुए कि वे शिरडी के साई बाबा की भक्त हो गईं और उन्हें के आदेश पर टैरो रीडिंग के जरिए लोगों की सेवा में आ गईं।

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