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पीएम की सुरक्षा के लिए हटीं ऐतिहासिक छतरियाँ

प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए बनारस की पहचान बन चुकीं ऐतिहासिक छतरियाँ हटा दी गईं, वहीं पंडे और साधु-महात्माओं को भी हटा दिया गया। मंदिरों-धर्मशालाओं में पुलिस ने कब्जा कर लिया है।ड्ढr घाटों पर लगने वाली ऐतिहासिक छतरियां और पंडे-पुरोहित बनारस की पहचान हैं। प्रधानमंत्री की सुरक्षा के नाम पर दशाश्वमेध, डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट, शीतलाघाट और प्रयागघाट पर लगीं बाँस की छतरियाँ हटा दी गई हैं। इन्हीं छतरियों में बैठकर पंडे-पुरोहित रोजाना धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। गवर्नमेंट एप्रूब्ड गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह कहते हैं कि घाटों से छतरियाँ तो किसी दशा में नहीं हटनी चाहिए थीं। छतरियों के हटने से घाटों की स्थिति बिना सिंदूर की महिला जैसी हो गई है। प्राकृतिक छटा गायब है। गंगा आरती भी ड्रामा लग रही है।ड्ढr गंगा के प्रमुख घाटों से पंडे-पुरोहितों को भी हटा दिया गया है। देसी-विदेशी पर्यटकों को फूल-माला, दीपक, एलबम और धार्मिक पुस्तकें बेचने वाले भी गायब हैं। दशाश्वमेध पर आह्वान अखाड़ा बंद हो गया है। बुधवार तक यह अखाड़ा साधु- संतों से गुलजार था। यहाँ रहने वाले साधु-संत कहाँ गए? यह किसी को पता नहीं है। शीतलाघाट और डा.राजेंद्र प्रसाद घाट की ओर से दशाश्वमेध घाट की ओर आने वाले रास्ते को बंद कर दिया गया है। दशाश्वमेध क्षेत्र की दुकानें शुक्रवार को बंद नहीं रहेंगी। दुकानदारों को हिदायत है कि वे अपने यहाँ भीड़ न लगने दें। गंगा आरती देखने के लिए उन सभी पर्यटकों को घाट पर बैठने दिया जाएगा जिन्हें विधिवत पास जारी रहेगा। 15 मार्च को बीएचयू के 0वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह समेत तीन नामचीन हस्तियों को विवि की आेर से डीलिट् की मानद उपाधि दी जाएगी। प्रधानमंत्री के अलावा मशहूर चित्रकार सतीश गुजराल और इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब को मानद उपाधि दी जाएगी।

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