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धसान नदी की जलधारा महोबा लाने की तैयारी

सूखाग्रस्त महोबा जिले में पेयजल समस्या के तात्कालीन समाधान के बाद जिला प्रशासन ने अब दीर्घकालिक परियोजनाआें पर काम शुरू कर दिया है। धसान नदी की जलधारा को मोड़कर महोबा की आेर लाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस परियोजना में अजरुन बाँध और कबरई बाँध आदि के साथ महोबा के तालाबों को भी पानी से लबालब करने का प्रस्ताव है। इस परियोजना पर करीब रोड़ की धनराशि व्यय होगी।ड्ढr जल विहीन होकर अपनी आभा और उपयोगिता खो चुके महोबा के ऐतिहासिक मदन सागर सरोवर के दिन फिर बहुरेंगे। प्राचीन चंदेलकालीन इस तालाब में जलराशि एक बार पुन: हिलोरें लेंगी, मछलियां तैरेगी और डेढ़ लाख की आबादी को पीने का पानी भी मुहैया होगा। प्रस्ताव को शासन की स्वीकृति यदि शीघ्र मिल गई तो अगले साल तक महोबा जिले में पानी की कोई समस्या नहीं रहेगी। यह दावा है जिला प्रशासन का। महोबा के तालाबों को भरने के लिए धसान नदी को महोबा की आेर लाने की तैयारी शुरू हो गई है। अजरुन सहायक परियोजना के नाम से पहले से ही सिंचाई विभाग की प्रस्तावित इस परियोजना में लहचूरा बाँध से अजरुन बाँध, कबरई बाँध आदि को भरने के साथ-साथ महोबा के तालाबों को भी पानी से लबालब करने का प्रस्ताव सम्मलित कर लिया गया है। महोबा की डीएम अनीता चटर्जी इस सम्बन्ध में बताती हैं कि जिले की पेयजल समस्या के सर्वकालिक समाधान के लिए पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा हमीरपुर से यमुना नदी के पानी को माइनर द्वारा लाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। बुन्देलखण्ड में सूखा जाँचने आए केन्द्रीय दल के अध्ययन दल को भी इस बाबत अवगत कराते हुए प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई थी लेकिन फरक्का समझौते के चलते यमुना जल उपलब्ध होने में दिक्कतों को देख उक्त प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया। प्रशासन द्वारा तैयार किए गए नवीन प्रस्ताव में झांसी की सीमा पर स्थित लहचूरा बाँध से धसान नदी के पानी को लाकर जिले को पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना है। सिंचाई विभाग द्वारा इस परियोजना को पहले ही स्वीकृति के लिए केन्द्र सरकार को भेजा जा चुका है। परियोजना को अब केवल पर्यावरण मंत्रालय की अंतिम स्वीकृति का इंतजार है।ड्ढr डीएम ने बताया कि महोबा की पेयजल सम्बन्धी आवश्यकताआें की पूर्ति के लिए अजरुन सहायक से जोड़कर तैयार की गई रोड़ की परियोजना में चरखारी के पास स्थित अजरुन बाँध से पानी को मदन सागर पहुँचाने का कार्य किया जाना है। मदन सागर के ऊँचाई वाले क्षेत्र में होने व अजरुन बाँध के निचले भाग में स्थित होने के कारण पानी को आसानी से पहुँचाने में हालांकि समस्या है लेकिन लिफ्ट प्रक्रिया को विशेष तकनीकी से स्थापित कर पानी को मदन सागर तक पहुँचाया जाएगा। उन्हांेने बताया कि इस परियोजना से पहले मदन सागर में सिल्ट सफाई, सुदृढ़ीकरण और सुन्दरीकरण का कार्य शीघ्र आरम्भ होगा। राज्य सरकार की सूखाराहत समिति द्वारा इस कार्य के लिए 70 लाख रुपए की धनराशि पहले ही स्वीकृत की जा चुकी है। इसी हफ्ते यह कार्य आरम्भ होने की उम्मीद है। इससे मदन सागर की जल संभरण क्षमता में वृद्धि के साथ सरोवर के बीचोबीच स्थित पर्यटन महत्व के खखरामठ स्थल को भी विकसित किया जाएगा ताकि पर्यटक जलराशि के मध्य स्थित ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के इस प्राचीन स्मारक के अवलोकन में विशेष आकषर्ण प्राप्त कर सके। पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे महोबा में अजरुन सहायक परियोजना का प्रस्ताव खास महत्वपूर्ण और लाभकारी माना जा रहा है। केन्द्र सरकार द्वारा अगर कोई अडं़गा न डाला गया तो अगले वर्ष तक परियोजना का कार्य काफी हद तक पूर्ण होने और जिले के लोगों को इसका लाभ मिलना शुरू होने की उम्मीद है।

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