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राज्य सुरक्षा आयोग व पुलिस स्थापना बोर्ड का गठन

यूपी में पुलिस महानिदेशक का कार्यकाल अब दो साल का होगा। राज्य सरकार ने पुलिस प्रशासनिक सुधार को लेकर सवर्ोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों पर अमल शुरू कर दिया है। इस वास्ते राज्य सुरक्षा आयोग और पुलिस स्थापना बोर्ड गठित करने का निर्णय भी ले लिया गया है। जल्द ही इस बारे में सवर्ोच्च न्यायालय में शासन की आेर से एक शपथपत्र भी दाखिल किया जाएगा जिसमें इन फैसलों काोिक्र होगा।ड्ढr प्रमुख सचिव गृह जे.एन.चैंबर ने गुरुवार को यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य सुरक्षा आयोग का गठन किया गया है। राज्य सलाहकार परिषद के अध्यक्ष, राज्य मानवाधिकार आयोग का एक सदस्य, प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक इसके पदेन सदस्य होंगे। इनके अलावा राज्य सरकार की आेर से दो गैर राजनीतिक व्यक्ित भी इसके सदस्य के रूप में नामित किए जाएँगे। डीजीपी आयोग के पदेन सचिव होंगे। गैर सरकारी सदस्यों का कार्यकाल अधिकतम दो वषरे के लिए होगा। यह आयोग पुलिस बल को चुस्त-दुरुस्त, प्रभावशाली, उत्तरदायी और प्रभावी बनाने के नीति-निर्देश बनाने की सलाह सरकार को देगा। पुलिस बलों के कायरे के मूल्यांकन में आयोग की भूमिका होगी। इसके लिए विभिन्न पुलिस बलों की कार्य दक्षता, उनके प्रति लोगों व पीड़ितों की संतुष्टि, विवेचना और संसाधनों का उचित प्रयोग प्रदर्शन के संकेतक (परफारमेंस इंडीकेटर) माने जाएँगे। पुलिस महानिदेशक का कार्यकाल अब सामान्यत: दो वर्ष का होगा। डीजीपी का चयन मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। प्रमुख सचिव गृह जे.एन. चैम्बर ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस तरह नियुक्त डीजीपी को अगर किसी अपराध में दंड दिया जाता है या फिर भ्रष्टाचार अथवा किसी अन्य कारणवश वे अपने पद के दायित्वों के निर्वाह में असमर्थ पाए जाते हैं तो राज्य सुरक्षा आयोग के परामर्श से उन्हें हटाया भी जा सकता है। अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों के तबादले आदि से संदर्भ में पुलिस स्थापना बोर्ड के गठन का निर्णय भी लिया गया है।ं

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  • Web Title: राज्य सुरक्षा आयोग व पुलिस स्थापना बोर्ड का गठन