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भारतीय लालू रेलवे, तुस्सी कमाल कर दित्ता!

इंडियन लालू रेलवे अर्थात् भारतीय लालू रेलवे ने इस वर्ष का रेल बजट प्रस्तुत करके कमाल कर दिखाया। कुली को गैंगमैन तथा गैंगमैन को गेटमैन बनाने का रास्ता खोल दिया। गेटमैन को अब गनमैन भी बनाया जा सकता है। गाड़ियों में गुण्डागर्दी को प्रोत्साहन देने के लिए छात्र-छात्राआें की यात्रा को नि:शुल्क कर दिया अर्थात् अब ये मुफ्त में बिना टिकट यात्रा करेंगे। बुजुर्ग व वरिष्ठ नागरिक यात्रियों को किराए में पचास प्रतिशत की रियायत दे दी, यह तब ही संभव हो सकेगा जबकि उनके पास वरिष्ठ नागरिक होने का मुहर लगा अपना पहचान-पत्र होगा। एड्स के मरीजों को सस्ती यात्रा का प्रलोभन दिया गया है। अब उसे टिकट की खिड़की पर सबके सामने अपने इस भयानक जानलेवा रोग की पोल खोलनी ही पड़ेगी। इस बात की कोई गारंटी नहीं होगी कि उसे कोई रेल के डिब्बे में अपने पास बैठने भी देगा कि नहीं। सामान्य श्रेणी के किराए में पांच फीसदी की कमी की घोषणा की गई है, अर्थात् दस रुपए का टिकट साढ़े नौ रुपए का मिलेगा। फिर वही अठन्नी पर झगड़ा मौजूद रहने दिया गया। अब वैसे भी पचास पैसे का महत्व समझता ही कौन है? सामान्य श्रेणी को झेलते रहने के लिए गरीब जनता को आदेश जारी कर दिया गया है। स्पष्ट है कि देश की गरीब जनता को अभी दो वर्ष तक रेलवे स्टेशनों पर टिकट लेने के लिए भारी धक्का-मुक्की लाइन में सहन करनी ही होगी, उसके बाद लालू यादव रेलमंत्री के रूप में रहेंगे ही नहीं। यात्री सुविधाआें के नाम पर अब तक की सबसे बड़ी धनराशि आठ सौ बावन करोड़ रुपए व्यय करने की घोषणा की गई है अर्थात् रेलवे स्टेशनों पर वषरे से सक्रिय विभिन्न प्रकार के असामाजिक तत्वों, रेलवे पुलिस, रेलवे कर्मचारियों, चाय-पकौड़े बेचने वालों, पानी की बोतल बेचने वालों को, ठगों को, वसूल करने वालों को, जेबकतरों को, सामान की चोरी करने वालों को गुप्त संकेत दे दिया गया है कि इस बड़ी धनराशि की वसूली यात्रा करने वाले यात्रियों से ही की जाए, अर्थात् लूट-खसौट को जोर-शोर से जारी रखा जाए।ड्ढr किशन लाल कर्दम, बी-514, जेजे कॉलोनी, हस्तसाल रोड, उत्तम नगर, नई दिल्ली आपका पहनावा, आपकी पहचान पहली दृष्टि में लोग अपने वस्त्रों, शरीर के डीलडौल से जाने जाते हैं। बाद में बातचीत द्वारा ज्ञान का परिचय होता है। आजकल क्या हो गया है लोग तड़क-भड़क आदि से ज्यादा जाने जाते हैं, जबकि पुरानी बातें थी- सादा जीवन उच्च विचार। आप किसी कार्यालय में प्रतिष्ठित पद पर हैं अच्छे गुणवान भी हैं। लेकिन वेषभूषा उपयुक्त नहीं है तो आपसे मिलने वालों में गलत संदेश जाएगा और हो सकता है पीछे आप पर फब्तियां कसें- कैसा है बगैर मुंह धोए कार्यालय आता है। दाढ़ी भी नहीं बनाता। आप बाजार जाते हैं। अपने नाते-निश्तेदारों से मिलते हैं। तो भी उनके सामने सलीके से आएं। आजकल क्या हो गया है समाज में दिखावा बढ़ रहा है, लोग आपके व्यवहार के बजाए आपका पहनावा, डीलडौल देखते हैं। अत: जरूरी है पहनावे को जगभाता बनाया जाए। भले ही आप कैसा ही खाकर पेट भरते हैं, अच्छे घर में भी नहीं रहते। लेकिन पहनावा उपयुक्त होना चाहिए। दूसरा गुण तहाीब या सलीके का होना चाहिए। प्रथम पहचान पहनावा ही है। इस पर किसी की उंगलियां न उठें, इससे बचना चाहिए।ड्ढr दिलीप कुमार गुप्ता, बरेलीआपका पहनावा, आपकी पहचानं

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