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छाँटो-बीनो और ले जाआे कक्ष निरीक्षक

क्ष निरीक्षक छाँटो-बीनो और ले जाआे। यूपी बोर्ड परीक्षाआें में अफसरों ने नकलमाफिया के लिए ऐसी ही मण्डी सजा दी है। अब तो कक्ष निरीक्षकों की जो डय़ूटी लगाई जा रही है उसमें शिक्षकों के नाम व पदनाम के बजाए उनकी संख्या लिखकर सूची केन्द्र व्यवस्थापकों को भेजी जा रही है। फायदा नकलमाफिया उठा रहा है।ड्ढr बोर्ड परीक्षा शुरू होते ही कक्ष निरीक्षकों की तैनाती के दावों की पोल खुल गई। जिला विद्यालय के हस्ताक्षर के बिना डय़ूटी चार्ट भेजने और परिचय पत्र कोड न लिखने का मामला सामने आया। इसमें सुधार के बजाए अफसर नकलमाफिया के लिए सभी बाधाएँ दूर करते जा रहे हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कुछ स्कूलों में कक्ष निरीक्षकों की जो डय़ूटी लगाई है उसमें शिक्षकों के नाम और पदनाम तक नहीं लिखे गए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक के हवाले से बीएसए ने सात मार्च को जो डय़ूटी चार्ट भेजा है उसके अनुसार पायनियर मांटेसरी इण्टर कॉलेज में अवध पब्लिक एकेडमी, गांधी विद्यालय इण्टर कॉलेज में जयकृष्णा पब्लिक स्कूल के एक-एक शिक्षक, पीएमएस इण्टर कॉलेज बरौली में पुनीत मांटेसरी स्कूल के पाँच शिक्षकों, एसबीएन इण्टर कॉलेज में शक्ित बाल विद्यालय गढ़ी कनौरा के दो शिक्षक, ब्राइट कैरियर इण्टर कॉलेज में सेंट लॉरेंस त्रिवेणी नगर के तीन शिक्षक, हजारी लाल उ. मा. विद्यालय में ग्रेडिएंट्स पब्लिक स्कूल के दो शिक्षकों की डय़ूटी लगाई है। माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के राज्य परिषद सदस्य डॉ. आरपी मिश्र कहते हैं कि कक्ष निरीक्षकों की तैनाती के नाम पर खुला खेल चल रहा है। इस तरह तो कोई भी व्यक्ित कक्ष निरीक्षक बन सकता है। संयुक्त शिक्षा निदेशक कृपा शंकर शर्मा का कहना है कि प्रधानाचार्य पर इतना विश्वास तो करना पड़ेगा और यदि जाँच में कोई फर्जी कक्ष निरीक्षक पाया जाता है तो कार्रवाई भी की जाएगी।

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