साइबर अपराधियों से निपटने को कानूनी संशोधन जरूरी - साइबर अपराधियों से निपटने को कानूनी संशोधन जरूरी DA Image
12 दिसंबर, 2019|1:12|IST

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साइबर अपराधियों से निपटने को कानूनी संशोधन जरूरी

गुमनाम और शातिर साइबर अपराधियों से निपटने के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी के संदर्भ में परिवर्तन बहुत जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया के किसी भी कोने से कम्प्यूटर के माउस के सिर्फ एक क्िलक से किए जा रहे साइबर अपराधों को रोकने के लिए अलग ही तरह के कानून कौशल जागरुकता और सुरक्षा प्रशिक्षण की जरूरत है। साइबर सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए जांच एजेंसियों के हाथ तकनीकी तौर पर मजबूत करने के साथ ही कानूनी तौर पर मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। सरकार का मानना है कि साइबर अपराधियों को सजा देने के वास्ते जांचकर्ताओं के लिए त्वरित कार्रवाई करने के साथ-साथ डिजिटल सबूत जुटाना और अदालत में इनका खरा उतरना काफी महत्वपूर्ण है। यहीं से शुरू होती है कानूनी पेचीदगियों का अध्ययन करके उनमें आवश्यक संशोधन करने की जरूरत। विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर अपराधियों को दोषी सिद्ध करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को हासिल करने और उनका संरक्षण देने की दिशा में भी अभी काफी कुछ किया जाना है। इसके लिए कानूनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक लाने की जरूरत है ताकि देशों की सीमाओं को तोड़ने वाले इन अपराधों से निपटने में विभिन्न देशों में समन्वय और सामन्जस्य बैठाया जा सके। साइबर अपराधों से तभी निपटा जा सकता है जबकि इनके संदर्भ में पूरी दुनिया में समान या कम से कम मिलते-जुलते कानून हों। सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कानून-2000 में संशोधन किया है।

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