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उन्मुक्त फिल्मों के लिए अलग हॉल

आलोचकों और दर्शकों से प्रशंसित वैसी विदेशी फिल्में जो भारत में केवल इसलिए रिलीज नहीं हो पाती थीं कि उनके कुछ दृश्य ‘अत्यधिक सेक्सी’ होते थे , अब भारत में भी थियेटरों में प्रदर्शित हो सकेंगी। लेकिन भारतीय फिल्मों के प्रति सेंसर के मौजूदा रुख में कोई बदलाव नहीं आ रहा है। यह छूट केवल उन विदेशी फिल्मों के लिए होगी जो दुनिया भर में चर्चित रही हैं लेकिन भारत में अपने ‘एक्सप्लीसिट सेक्सुअल कंटेंट’ (सेक्स के खुले चित्रण) की वजह से रिलीज नहीं हो पाती थीं। ऐसे दृश्यों पर कैंची चलाने वाला सेंसर बोर्ड ही इस पहल के पीछे है। सेंसर बोर्ड के केन्द्रीय सदस्यों की हाल की बैठक में यह मसला सदस्यों ने उठाया। सदस्यों ने कहा कि जब भारत में हर दिशा में प्रगति हो रही है, तो फिर इस मामले में दकियानूसी सोच क्यों रखी जाए? लिहाजा सेंसर बोर्ड ऐसी फिल्मों के दृश्यों को नहीं काटे, ताकि मूल कहानी से खिलवाड़ न लगे। सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष शर्मिला टैगोर जल्द ही इस प्रस्ताव को लेकर सूचना व प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी से मिलने वाली हैं। इस प्रस्ताव के अनुसार शुरुआती स्तर पर कोलकाता, दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में एक-एक थियेटर बनाए जाएंगे। यहां ऐसी फिल्मों का प्रदर्शन बिना किसी काट-छांट के होगा। वह विदेशी पत्रिका ‘टाइम आउट’ के हाल के एक लेख का उदाहरण देती हैं जिसमें लिखा गया है कि भारत में अच्छी विदेशी फिल्मों का प्रदर्शन कठिन है क्योंकि यहां के लोग ‘ऐसी फिल्मों की तारीफ नहीं करते और भारतीय सेंसर बोर्ड कई दृश्यों को काट देता’ है।ड्ढr वह कहती हैं,‘ मैंने देखा कि बैंडिट क्वीन के उस दृश्य में, जहां सीमा बिस्वास के कपड़े उतरे हैं, लोग सीटियां और तालियां बजा रहे थे। सेंसर करते वक्त हम भारतीयों की इस मानसिकता का ख्याल न करें तो कैसे काम चले?’ बहरहाल, सेंसर सदस्यों की राय के बाद बोर्ड अपने इस प्रस्ताव को न केवल सरकार बल्कि इंडस्ट्री के कुछ नामी-गिरामी फिल्मकारों द्वारा चलाए जा रहे फिल्म फेस्टीवल के पास भी लेकर जाने वाला है।

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