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राजरंग

हीं खुशी कहीं गम..ड्ढr भगवान बिरसा मुंडा ने कभी सोचा नहीं होगा कि उन्हें यह दिन देखना पड़ेगा। ऐसे तो उनके नाम पर राज्य का हर महत्वपूर्ण काम शुरू होता है, लेकिन विधानसभा सत्र के दौरान जनता हो या प्रशासन सभी उन्हें भूल जाते हैं। हमारे परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का जरूर सत्र के दौरान राहत महसूस करते होंगे, क्योंकि इस दौरान उन्हें अजीबो- गरीब लोगों से मुलाकात नहीं होती होगी। सत्र शुरू हुआ नहीं कि बिरसा चौक के निकट प्रदर्शन का दौर शुरू हो जाता है। भगवान बिरसा के सामने क्या-क्या नहीं होता। यह तो किसी की नजर से छुपा हुआ नहीं है। यहां जनता की रक्षक पुलिस उनकी ही भक्षक बन जाती है। हमारे नेता ऐसा भाषण देते हैं कि लोग मार-पीट पर उतारू हो जाते हैं। बेचारे भगवान बिरसा करें भी तो क्या करें। उनके सामने निदर्ोष पीटे जाते हैं। झारखंड के इस मसीहा को शायद अब अफसोस होता होगा। वहीं दूर खड़े अलबर्ट एक्का की शायद यही इच्छा होगी कि सालों भर विधानसभा सत्र चले, ताकि वे नेताआें, प्रदर्शनकारियों और फूल मालाआें से बचे रहें। प्रदर्शन कारी और निदर्ोष पर लाठियां भांजनेवाले जब अपने पर आते हैं, तो वे शायद भूल जाते हैं कि वे भगवान बिरसा मुंडा के सामने यह सारा कुछ कर रहे हैं।

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