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तो लद्दाख में हैं आर्यो के असली वंशज?ं

या जम्मू-कश्मीर के लद्दाख इलाके में मौजूद एक खूबसूरत इंसानी प्रजाति वास्तविक आर्यन की वंशज हैं ? यदि नहीं हैं तो जर्मनी के वैज्ञानिकों की इस क्षेत्र में पिछले लंबे समय से दिलचस्पी क्यों है ? जर्मनवासी खुद को आर्यन का वंशज मानते हैं। अब इधर जर्मन वैज्ञानिकों को जांच कहती है कि लद्दाख के क्षेत्र में बसा यह आदिवासी समूह ही आर्यनों की वास्तविक प्रजाति है। खबर है कि जर्मन वैज्ञानिक अरसे से उन पर शोध कर रहे हैं। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार जर्मनी के वैज्ञानिक इन लोगों के जेनेटिक मैटिरियल शोध के लिए जर्मन ले जाने में भी सफल हो चुके हैं। वैसे, इस प्रकरण से सरकार बेखबर है। लेकिन पिछले दिनों गृह मंत्रालय के जसंख्या महकमे की एक बैठक में जम्मू-कश्मीर से शिरकत कर रहे रजिस्ट्रार सीएस सप्रू ने यह मुद्दा उठाया। सप्रू का कहना था कि लद्दाख से करीब 30 किमी दूर कलसी गांव है। यहां पर रहने वाले आदिवासी आम कश्मीरियों से भिन्न हैं। वे ऊंचे कद, गोर रंग, सुनहर बाल और नीली आंखों वाले हैं। वे खुद को ‘ट्रु आर्यन’ यानी आर्यो के वास्तविक वंशज मानते हैं। ये लोग अपने समाज के अंदर ही सीमित रहते हैं तथा बाहरी दुनिया से परहेज करते हैं। उक्त अधिकारी के अनुसार जर्मन वैज्ञानिक यहां खूब आते हैं लेकिन इनके बीच वे ज्यादा नहीं घुस पाए। लेकिन जर्मन महिलाएं जिन्हें रिसर्च के लिए बतौर सबजेक्ट इस्तेमाल किया जाता है, इनके बीच घुसपैठ बनाने में सफल रही हैं। पता चला कि कई जर्मन महिलाएं इन आदिवासियों से गर्भधारण कर वापस जा चुकी हैं। ऐसा शोध प्रजाति पर शोध के लिए किया जा रहा है। वैसे, इतिहास के प्रोफेसर जसवंत नेगी का कहना है कि भारत में आर्य पंजाब के रास्ते पहुंचे थे इसलिए लद्दाख की तरफ शुरूआत दौर में ईसा से 7-8 हजार साल पूर्व उनके कदम पड़े होंगे। वैसे, यूनान के शासक अलक्जेंडर भी करीब 2200 साल पहले भारत आया था उसका भी रूट कश्मीर वाला रहा है। अलक्जेंडर भी आर्य वंश की यूरोपियन शाखा का वंशज होने का दावा करता था। इसलिए उपरोक्त संभावना से संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन जिस बैठक में यह सवाल उठाया गया, वह दूसर मुद्दे पर थी इसलिए इस पर आगे चर्चा नहीं हुई। लेकिन वहां मौजूद आईसीएमआर के एक साइंटिस्ट ने बताया कि बिना अनुमति के जेनेटिक मेटीरियल शोध के लिए देश से बाहर नहीं जा सकता। यदि कोई ऐसा करते हुए पकड़ा गया तो उस पर तस्करी के कानून के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

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