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चिकित्सा सेवा के नैतिक मूल्यों को बचायें: एए खान

रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एए खान ने कहा है कि चिकित्सा सेवा सभी प्रोफेशन में पवित्र स्थान रखता है। इसमें ज्ञान के सभी आयामों का प्रयोग होता है। हालांकि अन्य प्रोफेशन की तरह चिकित्सा सेवा में भी नैतिक मूल्यों का ह्रास हुआ है। इसे बचाने की आवश्यकता है। इसके लिए चिकित्सक समुदाय को आगे आना होगा। डॉ खान ने उक्त बातें ओबेस्ट्रिक एंड ग्यानोकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, रांची चैप्टर (रॉग्सी) और इंडियन एसोसिएशन ऑफ पेडियाट्रिक्स (आइएपी) की ओर से आयोजित स्त्री एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के 24वें नेशनल कांफ्रेंस (आइसोपार-08) में कहीं।ड्ढr इससे पूर्व कांफ्रेंस का उद्घाटन उन्होंने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस मौके पर आइसोपार की अध्यक्ष डॉ शुशिलम्मा, पटना की डॉ मंजू गीता मिश्रा, डॉ शोभा चक्रवर्ती, डॉ एके चौधरी, नवनियुक्त आइसोपार की अध्यक्ष डॉ पुष्पलता, डॉ उषा शर्मा, डॉ प्रीतिबाला सहाय, डॉ रीता दयाल, डॉ सुशीला मित्तल, डॉ एसएन त्रिपाठी अतिथि के रूप में उपस्थित थी। अपने संबोधन में डॉ शुशिलम्मा ने कहा कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर ही परिवार का स्वास्थ्य निर्भर होता है। डॉ एके चौधरी ने कहा कि झारखंड में मातृ-शिशु मृत्यु दर काफी अधिक है। इसे रोकने की आवश्यकता है। डॉ पुष्पलता ने कहा कि आइसोपार पर मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने की काफी अहम जिम्मेवारी है। इसका निर्वहन सोसाइटी के सभी चिकित्सकों को करना होगा। डॉ मंजू गीता मिश्रा ने मेडिकल कालेजों में प्रीनेटल मेडिसीन विभाग की स्थापना पर बल दिया। डॉ उषा रानी ने कहा कि हम राज्य के संसाधनों का उपयोग कर मातृ-शिशु दर को कम करने का प्रयास करें। उद्घाटन समारोह में रिम्स निदेशक डॉ एनएन अग्रवाल, आइएमए के डॉ अजय कुमार सिंह, डॉ सुषमा प्रिया, डॉ सुमन, डॉ सुनीता झा उपस्थित थीं।

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