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‘युवराज के नाटक’ से बसपा पसोपेश में

चुनाव नतीजों में कांग्रेस भले काफी पीछे रह गई हो लेकिन युवा सांसद व पार्टी महासचिव राहुल गांधी की राजनीति बसपा पर भारी पड़ रही है। बसपा को राहुल की हर चाल का जवाब देना पड़ रहा है। बुंदेलखण्ड के बाद मुख्यमंत्री को अचानक इटावा जाकर दलित परिवार की सुध लेनी पड़ी।ड्ढr पिछले दिनों अमेठी दौरे के दौरान राहुल ने एक रात दलित की झोपड़ी गुजारी। राहुल ने उनके साथ खाना भी खाया। बसपा ने इसे ‘युवराज का नाटक’ कहा। लेकिन युवराज कोई मौका नहीं छोड़ रहे। कुछ महीने पहले जौनपुर के एक भूखे और असहाय दलित को पैसा भेजकर उन्होंने इलाज के लिए दिल्ली बुलवा लिया था।ड्ढr बुंदेलखण्ड की सूखे से सबसे ज्यादा गरीब दलित प्रभावित हैं। राहुल ने बुंदेलखण्ड जाकर दलित बस्तियों का दौरा किया। गाँवों में घूमकर सूखा ग्रस्त किसानों का हाल पूछा। उन्होंने झाँसी की रैली में आह्वान किया कि मुख्यमंत्री खुद आकर बुंदेलखण्ड की दुर्दशा देखें। मुख्यमंत्री को न केवल बुंदेलखण्ड जाना पड़ा बल्कि उन्हें राहत पैकेज की घोषणाएँ भी करनी पड़ीं। कांग्रेस इन घोषणाआें का श्रेय लेने में पीछे नहीं रही। इटावा के अमीनाबाद गाँव में 13 मार्च को जमीन के विवाद में पाँच दलितों की नृशंस हत्या हो गई। घटना के कुछ घंटे बाद ही राहुल गांधी के इटावा जाने के कार्यक्रम की घोषणा हो गई। मुख्यमंत्री मायावती प्रधानमंत्री की अगवानी में वाराणसी गई थीं। इससे पहले कि शनिवार को राहुल इटावा पहुँचें मुख्यमंत्री शुक्रवार को ही अचानक अमीनाबाद गाँव पहुँच गईं।ड्ढr पिछले साल विधानसभा चुनाव की इटावा की एक रैली में राहुल गांधी ने जनता से कहा था कि चुनाव परिणाम जो भी हो वह जनता के सुख दुख में शिरकत करने यहाँ आते रहेंगे। हत्याकाण्ड की खबर सुन कर राहुल इटावा आए। उन्होंने दलितों के साथ खेत में खाना खाया। इटावा में जिस तरह से राहुल को देखने के लिए भीड़ टूटी उससे कांग्रेसी उत्साहित हैं। प्रवक्ता राम कुमार भार्गव ने कहा कि दलितों की हत्या हो गई और सरकार को कोई अफसर तक घटना स्थल पर नहीं पहुँचा। इटावा से लौटे कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार यहाँ शानो-शौकत के साथ दलितों के नेता का जन्मदिन मना रही है और वहाँ राहुल गांधी गाँवों में जाकर दलितों के आँसू पोछ रहे हैं।

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