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यूपी अपनी विरासत फिर तलाशे:पीएम

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में विकास की नई हवा बहनी जरूरी है क्योंकि पिंछले कुछ साल में यह प्रदेश काफी पिछड़ गया है। शनिवार को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के 0वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री ने अफसोस जताते हुए कहा कि 50 साल पहले उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास में सबसे आगे था और विकास की नई बयार बहाने के लिए राज्य के लोगों को अपनी विरासत को फिर से तलाशना होगा।ड्ढr प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी दिली तमन्ना है कि सभ्यता, कला-संस्कृति, शिक्षा एवं औद्योगिक क्षेत्र में राज्य फिर से विकसित कहलाए। उन्होंने यह भी कहा कि यूपी के सभी विश्वविद्यालयों को ज्ञान और आधुनिक शिक्षा का केन्द्र बनाना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों, नौजवानों, पुरुषों, महिलाआें, मजदूरों और शिल्पकारों को आधुनिकीकरण का लाभ मिलना चाहिए। नए उद्योग लगाने के अलावा राज्य में बुनियादी ढाँचे को भी मजबूत बनाने की जरूरत है।ड्ढr प्रदेश के अतीत की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वाराणसी सभ्यता का केन्द्र रहा और इलाहाबाद शिक्षा का। कानपुर बड़ा औद्योगिक केन्द्र था, जबकि कला और संस्कृति में लखनऊ का कोई सानी नहीं था, लेकिन लगातार यह प्रदेश पिछड़ता रहा। प्रधानमंत्री, प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब और जाने-माने चित्रकार सतीश गुजराल को इस मौके पर बीएचयू के चांसलर व पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. कर्ण सिंह ने डी.लिट की मानद उपाधि देकर सम्मानित किया। श्री हबीब और श्री गुजराल समारोह में मौजूद नहीं थे। प्रधानमंत्री ने 28 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक भी दिया। उन्होंने कहा कि बीएचयू महज शैक्षिक परिसर ही नहीं, महामना मालवीय जी के विश्व दर्शन की अभिव्यक्ित है।ड्ढr बाद में डॉ. सिंह बाबतपुर हवाई अड्डे से वायुसेना के विशेष विमान से नई दिल्ली रवाना हो गए। हवाई अड्डे पर उन्हें विदा करने के लिए राज्यपाल टीवी राजेस्वर, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्र, और वारणसी के कमिश्नर उपस्थित थे।ं

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