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दिल्ली : सफदरजंग का होगा इलाज

दिल्ली में निजी अस्पतालों और नर्सिग होम की भीड़ है। पच्चीस हजार से अधिक छोटे-बड़े निजी अस्पताल शहर में हैं। इस भीड़ में सरकार 4,000 करोड़ रुपये की लागत से सफदरजंग अस्पताल को सुपर-डुपर अस्पताल के रूप में विकसित करने जा रही है। 2015 तक यह अस्पताल दिल्ली के गौरव ‘एम्स’ से आगे निकल जाएगा। सफदरजंग तब न केवल नई इमारतों, बल्कि आई.टी. चालित बेहतरीन चिकित्सा प्रबंध की वजह से राजधानी का नया गौरव बन जाएगा। पहले इसे पन्द्रह सालों में पूरा किया जाना था। अब इसे छह साल में पूरा करने का इरादा है। इसे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण का काम एक साल के अंदर शुरू हो जाएगा। हर चिकित्सा विभाग के लिए अलग-अलग टॉवरें होंगी। पूरा हो जाने के बाद हर रोज दस हजार मरीज इसकी ओ.पी.डी. में देखा जा सकेगा। अस्पताल का काफी बड़ा हिस्सा अभी पुरानी बैरकों में चल रहा है। देश भर से करीब छह हजार मरीज हर रोज इसकी ओ.पी.डी. में आते हैं। लेकिन उन्हें तमाम असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। सफदरजंग अस्पताल की मौजूदा हालत इतनी खस्ताहाल है कि रिहैबिलिटेशन, एमरजेंसी थियेटर की गैलरी की छतें बारिश में टपकती हैं। एक वरिष्ठ चिकित्सक के अनुसार, यूपी-बिहार से बहुत सारे रोगी आते हैं और ओपीडी में इलाज करा के सायंकाल वापस चले जाते हैं। कायाकल्प हो जाने के बाद उसमें कॉरपोरेट अस्पतालों जैसी सुविधाएं भी होंगी। एम्स से भारी संख्या में रेफरेल केसेज के आने की वजह से सफदरजंग पर वर्कलोड बढ़ जाताहै। इस समय सफदरजंग अस्पताल में 1531 बेड हैं, जिन्हें बढ़ा कर 3000 कर दिया जाएगा। आपरेशन थियेटरों की संख्या 32 है। इन्हें बढ़ा कर 64 किया जाएगा। कामनवेल्थ गेम्स के मद्देनजर यहां पहले चरण में इंस्टीटयूट ऑफ आर्थोपीडिक में सेंटर फॉर स्पोर्ट्स इन्जरी भी बनाया जाएगा ताकि खिलाड़ियों को यहां बेहतरीन चिकित्सा मिल सके।ं

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