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सीतामढ़ी:विकास के मुद्दे ने रचा इतिहास

सीतामढ़ी संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के जनता दल यू के प्रत्याशी अजरुन राय की जीत को स्थानीय लोग नीतीश कुमार के विकास कार्य की जीत मान रहे है। स्थानीय महावीर स्थान निवासी अधिवक्ता पारसनाथ गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्य में किए गए विकास कार्य का फल अजरुन राय को मिला है। हम अजरुन को नहीं जानते, किन्तु नीतीश कुमार के प्रतिनिधि के नाम पर उसका समर्थन सीतामढ़ी के लोगों ने किया है। चोरौत से हेमंत शुक्ला विकास के नाम पर सम्पूर्ण जातीय समीकरण ध्वस्त हो गया विकास के प्रति संकल्पित लोगों ने एनडीए के प्रत्याशी अपना समर्थन देकर कर विजयी बनाया है। आने वाले दिनों में भावी जनप्रतिनिधि के लिए यह एक सबक भी है। भोला दास राजोपट्टी ने कहा कि यह किसी नेता तथा पार्टी के उम्मीदवार की नहीं विकास के संकल्प के साथ काम करने वाले पार्टी की मजदूरी है। परोहा के रामगोविंद राय ने कहा कि इस जीत से खुशी है और भविष्य में काम करने वाले नेताओं के लिए शुभ संकेत है कि आम आदमी के लिए काम करने वाला लोग ही जितेगा। रामपुर परोरी के शिव शंकर कुमार ने कहा कि जनता बदलाव चाहती थी तथा परिवार बाद में आकंठ डूबे स्थानीय सांसद सीताराम यादव को हार का सामना करना पड़ा। ढेंग गांव की गृहणी उषा सिन्हा ने कहा कि अब विकास करने वाले को ही जीत होगी जाति, धर्म तथा पैसे के बल पर जीत का सपना देखने का समय खत्म हो गया। रून्नीसैदपुर के अभय साह ने कहा कि अजरुन राय की सादगी ही उसके जीत का कारण बना है। गरीब का बेटा भी संसद में जा सकता है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण बना है जदयू प्रत्याशी। वहीं ललन कुमार डुमरा ने ही जीत का कारण विकास बताया। सरस्वती देवी सीमरा ने इसे विकास की जीत बताया है। अधिवक्ता नागेन्द्र शरण ने कहा कि विकास के कारण इस क्षेत्र का परिणाम ऐसा रहा। इससे विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। पश्चिम चम्पारण :नीतीश की लहर में पार लगे संजयड्ढr कुमार रवि ‘रेक’ड्ढr नीतीश लहर में डॉ. संजय जायसवाल ने भी बाजी मार ली। फिल्मी दुनिया की दमदार छवि लेकर मैदान में उतर प्रकाश झा को फिर से पराजय का सामना करना पड़ा। अपराध और अपराधियों पर आश्चर्यजनक तरीके लगाम कसने को जनता ने खुब पसंद किया। गंडक दियार से जुड़े नौतन विधानसभा क्षेत्र में प्रकाश सेवा संस्थान द्वारा चलाये गए सेवा कार्यो को जनता ने कम महत्व दिया। कुख्यात भागड़ यादव के आतंक की समाप्ति ने इस क्षेत्र से डॉ. संजय जायसवाल को हाार से अधिक मतों से बढ़त दिलायी। जबकि भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले चनपटिया में प्रकाश झा अधिक प्रभावी रहे। चनपटिया से डॉ. जायसवाल मात्र 481 मतों की बढत हासिल कर पाये। बेतिया विधानसभा में उनके बढ़त का अंतर 00 वोटो का रहा। इसी प्रकार सुगौली विधानसभा में डॉ. संजय को 5100 की बढ़त मिली। जबकि रक्सौल विधानसभा क्षेत्र ने उन्हें 17800 की बढ़त देकर 46 हाार मतो के निर्णायक अंतर से विजयी बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एनडीए ने अपराध मुक्त विकास के नाम पर वोट मांगा था। जिसे वोटरों ने पसन्द किया। कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में साधु यादव का 50 हाार से अधिक वोट बटोरना भी डॉ. संजय जायवाल के लिए वरदान साबित हुआ। कुमार रवि ‘रंक’ड्ढr ड्ढr महाराजगंज:हार के कारणों की होगी पड़तालड्ढr निज संवाददाताड्ढr महाराजगंज संसदीय सीट से एनडीए के प्रत्याशी व जदयू नेता प्रभुनाथ सिंह की हार पूर क्षेत्र में आसानी से स्वीकार करने वाली खबर नहीं रही। पूर दिन जदयू नेता के हार- जीत की अटकलें लगती रहीं। राजद के उमाशंकर सिंह ने उन्हें तीन हाार मतो के बेहद कम अंतर से पराजित किया। समर्थकों और विश्लेषकों के लिए यह परिणाम चौंकाने वाला रहा । पर मतदान के बाद जिस तरह से राजद प्रत्याशी के समर्थक अपनी जीत का दावा कर रहे थे उससे उनके आत्मविश्वास का पता तो चलता ही था। जदयू प्रत्याशी ने लगातार तीन बार महाराजगंज संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व किया। वोटों के मार्जिन से इतना तो तय हुआ कि चुनाव कांटे का था और कांग्रेस के प्रत्याशी ने इस परिणाम में अहम भूमिका निभाई। उन्हें करीब अस्सी हाार वोट मिले। मालूम हो कि पिछले लोकसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी के पुत्र जीतेन्द्र स्वामी राजद के ही टिकट पर चुनाव में उतर थे पर उन्हें करीब 45 हाार मतों से हार का मुंह देखना पड़ा था। पर तब कांग्रेस के तारकेश्वर सिंह और बसपा के उम्मीदवार चुनाव मैदान में नहीं थे। महाराजगंज संसदीय क्षेत्र में परिसीमन के बाद गोरयाकोठी विधानसभा के शामिल होने पर भी विश्लेषकों की नजर थी। कहा गया था कि यही क्षेत्र इस संसदीय सीट का भविष्य तय करगा। लोगों का मानना है कि यह फैक्टर भी महत्वपूर्ण रहा। ममतगणनाकेन्द्र पर खड़े शिवहर सिंह ने कहा कि हार का यह अंतर अजीब है। बड़ी आसानी से पता नहीं चलेगा कि आखिर चूक कहां हो गई। गौर देने वाली बात यह भी है कि यहां से प्रथम तीन राजपूत उम्मीदवार ही विजयी रहे हैं। वोटों के विभाजन होने की भी बात लोग कह रहे हैं। मुजफ्फरपुर:पहली बार बड़ी मात खाए जार्जड्ढr हिन्दुस्तान ब्यूरोड्ढr मुजफ्फरपुर संसदीय सीट कई उलटफेरों का गवाह बनी। कैप्टेन जयनारायण निषाद का तीर चला तो दिग्गज समाजवादी नेता जार्ज फर्नाडींस को बिहार की धरती पर पहली बार इतनी बड़ी मात मिली। बड़ी अरमान से जार्ज वहां से चुनाव लड़ने पहुंचे थे। पिछली बार वे नालंदा छोड़कर मुजफ्फरपुर के चुनावी दंगल में उतर और जीत दर्ज कर सांसद बने थे। मौजूदा लोकसभा में वे मुजफ्फरपुर के ही प्रतिनिधि थे, लेकिन महाराष्ट्र मुद्दे पर पार्टी स्टैंड के साथ एमपी पद से इस्तीफा दे दिया था। बढ़ती उम्र और बीमारी ने उन्हें तोड़ दिया था। पार्टी चाहती थी कि वे आराम करंलेकिन वे चुनाव लड़ने पर अड़ गए। हाल यह हुआ कि उन्होंने पार्टी लाइन से अलग हटकर निर्दलीय ही अखाड़ा में उतरने का मन बना लिया। चुनाव के पहले ही उनका साथ देने वाले किनार होते गए और हाल यह हो गया कि वे पूरी तरह अकेले पड़ गए। इसी वजह से बीच में ही वे अभियान छोड़कर वे दिल्ली निकल गए। हालांकि चुनाव की कमान अपने पुराने सहयोगियों को थमाई और समाजवादियों के जिम्मे लड़ाई छोड़ गए। जार्ज की जिद के कारण यहां की लड़ाई सीधे जार्ज बनाम नीतीश हो गई।ं

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