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सरकारी आवासों पर करोड़ों फूँके

मंत्रियों, विधायकों और दूसरे वीआईपी लोगों के आवासों की मरम्मत के नाम पर सरकार कोकरोड़ों रुपए की चपत लगाने वाले इंजीनियर,ठेकेदार और अफसर जल्द सरकार की गिरफ्त में होंगे। राज्य सरकार ने बीते वित्तीय वर्ष 2006-2007 में करोड़ों रुपए के खर्च से विधायक निवासों और राज्य अतिथि गृहों में कराए कामों का भौतिक सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए एक जाँच टीम का भी गठन कर दिया गया है। टीम को एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।ड्ढr बीते साल तत्कालीन सरकार ने दारुलशफा के सभी तीन विधायक निवासों सहित रायल होटल, ओसीआर बहुखण्डी आवास, पार्क रोड, आफिसर्स हास्टल, डालीबाग के बहुखण्डी मंत्री आवास सहित अति विशिष्ट अतिथि गृह, डालीबाग के विशिष्ट अतिथि गृह और मीरा बाई मार्ग के राज्य अतिथि गृह के लिए लगभग 5 करोड़ रुपए मरम्मत, विशेष निर्माण कार्यो और साज-सज्जा के लिए स्वीकृत किए थे। इस धन को अनुरक्षण खण्ड के इंजीनियरों ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की सहमति से खर्च कर दिया। शासन को इस धन से कराए गए कार्यो की रिपोर्ट भी भेज दी।ड्ढr इस बीच प्रदेश में सरकार बदली। राज्य में बसपा सरकार के बनने के बाद से ही विधायक निवासों और अतिथिगृहों की बदहाली की शिकायतें शासन को मिलने लगीं। विधानसभा में भी विधायकों ने निवासों की खस्ताहाली और इस मामले में राज्य सम्पत्ति विभाग के रवैए को लेकर शिकायत दर्ज कराई। इसमें भारी धाँधली की शिकायतें हुईं। हालत यहाँ तक पहुँच गई कि शिकायतों से दुखी विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर को पिछले दिनों विधायक निवासों का औचक निरीक्षण करना पड़ा। निवासों की बदहाली देख विधानसभा अध्यक्ष ने राज्य सम्पत्ति के अधिकारियों और इंजीनियरों को कड़ी फटकार लगाई। श्री राजभर ने निरीक्षण के बाद शासन को पत्र लिख कर जल्द से जल्द विधायक निवासों के हालात सुधारने के आदेश दिए। सूत्रों के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष के दौरे के बाद चौकन्ना हुए शासन ने विधायक निवासों के रखरखाव पर हर वर्ष होने वाले करोड़ों रुपए के ब्योरे का पता लगाया तो दाल में कुछ काला नजर आया। यह भी पता चल गया कि मरम्मत के नाम पर इंजीनियरों, ठेकेदारों और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के कॉकस ने बीते वित्तीय वर्ष में करोड़ों के वारे न्यारे किए हैं। सूत्र बताते हैं कि राज्य सम्पत्ति विभाग के निदेशक प्रभात मित्तल ने इस बारे में आदेश जारी कर दिया है। आदेश में निदेशक ने व्यवस्थाधिकारियों काजाँच दल गठित कर उसे निवासों और अतिथि गृहों में 2006-2007 में कराए गए कार्यो का भौतिक सत्यापन करने के आदेश दिए हैं। जाँच दलों को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट निदेशक को सौंपनी है। जब इस बारे में राज्य सम्पत्ति निदेशक श्री मित्तल से पूछा गया तो जाँच की बात उन्होंने स्वीकारी। जाँच की वजह पूछे जाने पर उन्होंने इसे रुटीन जाँच बताया।ं

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