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पहले ही मोड़ पर फंसी फोर्स इंडिया

ामरूला वन रेसिंग में उतरने वाली किसी भारतीय मालिक की पहली टीम फोर्स इंडिया को आज यहां अपनी शुरुआती परीक्षा में ही ऑस्ट्रेलियन ग्रां प्री में मायूसी का सामना करना पड़ा। फोर्स इंडिया के मालिक भारत के अरबपति विजय माल्या हैं। किसी ने भी नहीं सोचा था कि मैकलॉरेन और फेरारी को उनकी टीम चुनौती दे सकेगी। लेकिन इतनी तो उम्मीद थी ही कि उनके ड्राइवर रेस पूरी करने में कामयाब रहेंगे। लेकिन फोर्स इंडिया की दोनों कारें रेस पूरी करने में नाकाम रहीं। पूर्व ऑस्ट्रेलियन ग्रां प्री विजेता इटली के गियानकालर्ो फिसिचेला पहले कार्नर से ही बाहर हो गए। जर्मनी के एंड्रियन सुतिल को हाइड्रोलिक प्रैशर की समस्या के कारण आठवें चरण के बाद रिटायर होना पड़ा। टीम के मुख्य तकनीकी अधिकारी माइक गैस्कैन ने कहा, ‘सीजन की पहली रेस हमारे लिए बहुत निराशाजनक रही। हमने अंक बनाने का बेहतरीन मौका खो दिया। हमें अगले हफ्ते मलयेशिया में बेहतर परिणाम के लिए कोशिश करनी होगी।’ फिशिचेला ने ग्रिड पर 16वें स्थान से अच्छी शुरुआत की मगर कारों की भीड़ में फंस कर उनका अभियान अचानक ही खत्म हो गया। उन्होंने कहा, ‘मैं पहले ही मोड़ पर बाहर हो जाने से बेहद निराश हूं।’ फिशिचेला ने कहा, ‘इसमें मेरी कोई गलती नहीं थी। एक कार अचानक मेरे सामने आ गई। हमारे पास अंक हासिल करने का अच्छा मौका था जिसे हमने गंवा दिया।’ सुतिल ने पिट से रेस शुरू की। वह पहले कोने पर उथल-पुथल से निकल गए और 13वें स्थान तक पहुंचने में सफल रहे लेकिन इसके बाद कार में तकनीकी समस्या के कारण उन्हें रेस से बाहर होना पड़ा। फोर्स इंडिया ने पिछले सीजन में फामरूला वन में स्पाइकर के नाम से हिस्सा लिया था। जासूसी मामले में मैकलॉरेन के सभी अंक छिनने के बाद वह 11 टीमों के बीच 10वें नंबर पर रही थी। माल्या ने टीम को इस उम्मीद में खरीदा है कि जब दिल्ली 2010 में फामरूला वन की मेजबानी करेगा उस समय तक यह मंच तक पहुंचने की स्थिति में आ जाएगी। लेकिन अब उन्हें पता लग गया होगा कि यह काम इतना आसान नहीं है। अपनी टीम की नाकामी के बावजूद माल्या ने कहा कि अब भी काफी उत्साहजनक संकेत हैं। उन्होंने कहा, ‘प्रैक्िटस सत्र में अपनी टीम की रफ्तार से मैं बहुत खुश हूं।’

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