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दो सीटों पर जीत का आसरा टूटा

सांसद पप्पू यादव नाराज हुए और चुनाव से पहले ही कोसी क्षेत्र में राजद-लोजपा गठबंधन का कम से कम दो सीटों पर जीत का आसरा टूट गया है। लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान की आशंका सच साबित हुई। अब उन्हें सुपौल के लिए नया उम्मीदवार खोजना होगा। पूर्णिया में अपने उम्मीदवार की जीत के लिए अधिक मशक्कत करनी होगी। विवाद की जड़ पूर्णिया संसदीय सीट रही। श्री यादव पूर्व में यहां के सांसद भी रहे हैं। वे चाहते थे कि पूर्णिया की उम्मीदवारी उनकी मर्जी से तय हो।ड्ढr ड्ढr इधर लालू और पासवान भी जिद पर अड़े रहे। लोजपा ने बहुत पहले शंकर झा को पूर्णिया से उम्मीदवार बना दिया था। उम्मीद यह थी कि राजद की मदद मिलने पर यहां लोजपा की स्थिति मजबूत होगी। पूर्णियां के एवज में राजद ने पप्पू को मधेपुरा से किसी अपने को लड़ाने का ऑफर दिया। यह पप्पू को मान्य नहीं था। एक दौर में पासवान भी अड़े। उन्होंने शत्र्त रख दी कि पहले पप्पू पूर्णिया से न लड़ने का वादा करं तभी उनकी पत्नी को सुपौल से टिकट दिया जाएगा। बाद में लालू प्रसाद की गारंटी पर श्रीमती रांन को टिकट दिया गया।मगर, पप्पू किसी भी हालत में पूर्णिया छोड़ने पर राजी नहीं हुए। कांग्रेस के लिए प्रचार करने की उनकी घोषणा से राजद-लोजपा सकते में है। कोसी के कुछ क्षेत्रों में एक समय पप्पू यादव का प्रभाव था। इसीके चलते लालू प्रसाद ने 2004 में अपनी जीती हुई मधेपुरा उन्हें दे दी थी। उस चुनाव में श्री प्रसाद मधेपुरा के अलावा छपरा से भी जीते थे। जाहिर है, पप्पू यादव इसबार भी सुपौल और पूर्णिया में राजद के जनाधार को प्रभावित करने की कोशिश करंगे। इसमें अगर कामयाबी मिलती है तो लोजपा को सुपौल और पूर्णिया तथा राजद को मधेपुरा में पप्पू समर्थक वोटरों से जूझना होगा।

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