बाघों को ‘घर’ में ही मिलेगा मनमाफिक आहार - बाघों को ‘घर’ में ही मिलेगा मनमाफिक आहार DA Image
6 दिसंबर, 2019|1:23|IST

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बाघों को ‘घर’ में ही मिलेगा मनमाफिक आहार

तराई में अब बाघों को जंगल में ही अपने मनमाफिक आहार मिलने लगेगा। इसके लिए दुधवा टाइगर रिजर्व में लैंड स्केप मैनेजमेंट पर अमल शुरू हो गया है। इसके तहत बाघों को जंगल के और अधिक अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने और उनके प्राकृतिक वास को नष्ट होने से रोका जा सकेगा।ड्ढr हाल ही में ईसानगर और सहजनवाँ में लोगों को बाघ ने निवाला बना लिया था। अब यहाँ के ग्रामीण बाघों की घात में रहते हैं और वे किसी भी समय आक्रामक हो सकते हैं। इसी के मद्देनजर बाघों के जंगल से निकलने पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण अब सचेत हुआ है।ड्ढr वन्य जीव विशेषज्ञ मानते हैं कि जंगल से बाघों के निकलने के पीछे उनके प्राकृतिक वास में मानव की बेजा दखलंदाजी व खाद्य श्रंखला का टूटना है। जंगलों में अवैध अतिक्रमण जारी है और बाघ बेघर हो रहे हैं। हिरन जैसे जानवरों की कमी से भी बाघों को भोजन के लाले पड़ने लगे हैं।ड्ढr वन्य जीव संरक्षण से जुड़े अफसरों ने महसूस किया है कि जंगल से सटे क्षेत्रों में अनियोजित विकास काा प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष प्रभाव जंगलों पर पड़ रहा है। जंगलों के आसपास उगने वाली नरकुल लुप्त होती जा रही है। नरकुल बाघों का प्रिय वास होता है। अब नरकुल की जगह गन्ने के खेत हैं। मनुष्यों के दखल से बाघ सुरक्षित ठिकानों की तलाश में जंगल से बाहर आते हैं, जहाँ उन्हें असुरक्षा मिलती है।ड्ढr अब दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में घास के मैदान विकसित करने की योजना है, जिससे हिरनों की संख्या बढ़े और बाघों को जंगल के अंदर भोजन मिल सके। वनों में अवैध अतिक्रमण को अभियान चलाकर हटाया जा रहा है।ड्ढr हाल ही में पद्मश्री विली अर्जन सिंह के कब्जे से भी वन भूमि खाली कराई गई है। टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बरसात में जलभराव से निबटने का भी प्रयास किया जा रहा है। जलभराव से जंगल की घास सड़ जाती है, जिससे हिरनों के लिए भोजन की कमी हो जाती है। यही नहीं, पूरी खाद्य श्रंखला ही गड़बड़ा जाती है। दुधवा टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक पीपी सिंह का कहना है कि जब तक जंगल मंे बाघों के लिए अनुकूल वातावरण, सुरक्षित और प्राकृतिक वास तथा मनपसंद भोजन उपलब्ध नहीं होता, बाघों का पलायन रुकना संभव नहीं। उन्होंने कहा कि फसल चक्र का सही प्रबंधन भी जरूरी है। उधर, दुधवा नेशनल पार्क के सोनारीपुर रेंज में एक मादा बाघ ने तीन शावकों को जन्म दिया है।

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