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पवरे से मजबूत होती है देश की एकतां

हमारा देश अनेकता में एकता का प्रतीक है और यहां पर बहुसंस्कृति का चलन है। इसमें पर्व-त्योहार एक-दूसरे को जोड़नेवाले होते हैं। अगर कोई ताकत राष्ट्र को बोली या संस्कृति पर बांटने का या इसमें जहर घोलने का प्रयास करेगा तो उसे मुंह की खानी पड़ेगी। राज्यपाल आरएस गवई ने तारा संगीत परिषद द्वारा भारतीय नृत्य कला मंदिर मुक्ताकाश मंच पर आयोजित राष्ट्रीय एकता उत्सव का उद्घाटन करते हुए ये बातें कहीं।ड्ढr ड्ढr राज्यपाल ने कहा कि भले ही देश में अनेक भाषाएं बोली जाती हों और संस्कृति अलग-अलग हो पर हम सब एक हैं और यही हमारी ताकत है। जिस तरह से अलग-अलग रंग मिलने से इंद्रधनुष बनता है उसी प्रकार की हमारी संस्कृति भी है। हमें देश की समृ िव भाईचारा बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रयास करना होगा। इस मौके पर तारा संगीत परिषद द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। तारा गुप्ता द्वारा गाए गीत ‘होली खेलत नंदलाल’ पर कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नृत्य ने लोगों का मन मोह लिया। इसके बाद ‘यशोदा के लाल खेले होरी’ पर स्थानीय व विदेशी कलाकारों के कत्थक नृत्य ने लोगों को सम्मोहित कर दिया। नृत्य में संजीत परिहस्त, बंपन, नतालिया, ऐला व पायल ने अपने प्रदर्शन से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।ड्ढr ड्ढr वहीं कार्यक्रम में सितार पर चंद्रचूर भट्टाचार्य, गायन बापी दादा का, तबला पर उत्पल घोषाल व सारंगी पर आयूष संगत कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सांसद गिरीश संघी, गोपाल भोर, रामनरेश गुप्ता, श्याम बिहारी प्रभाकर व राधेश्याम गुप्ता उपस्थित थे। इस मौके पर तारा गुप्ता ने कहा कि होली के इस मौके पर देश के जवानांे को हमें नहीं भूलना चाहिए जो हमें ऐसे त्योहारों को मनाने का अवसर प्रदान करते हैं।

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