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..अरे तो बबलुआ

शांति चाची सुबह-सुबह उठ कर टहल रही थीं, तभी मुहल्ले का युवक, जो रिश्ते में उनका भगिना लगता है, गुजरा। मुलाकात हुई। युवक बोला-मामी 25 तारीख के वोट देवे जरूर जइह., और मुहर राजन शर्मा (बदला हुआ नाम) के चुनाव चिह्न् ढोलके पर लगइह..। चाची को कुछ समझ में नहीं आया। पूछ बैठीं-अरे अब ई राजन शर्मा कवना आ गइलन हो। आजे से पहिले नाम नइखीं सुनले। युवक बोला, धत मामी, तू का बात कर रहल ह.। अपन बबलू भईया के बारे में बात करइत हिव। उनके नाम राजन शर्मा ह.। चाची बोलीं, अरे तो अइसन बोल न, कि आपन बबलुआ के वोट देना है, ई राजन शर्मा बोल के कनफ्यूजिया काहे रहा है।ड्ढr दरअसल यह आलम हर जगह है। लोग प्रत्याशियों के सर्टिफेकट नाम सुनकर समझ नहीं पा रहे कि हमारा बगलवाला ही चुनाव में खड़ा है। यह समझ कर प्रत्याशियों ने इसका हल निकाला और पर्चे पर लिखना शुरू किया, राजन शर्मा उर्फ बबलू, विरेंद्र सिंह उर्फ संटू, बलदेव साहू उर्फ बल्लू..आदि-आदि। तो कनफ्यूजन हटाइये और डालिये वोट।

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