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लापता बाघों को वापस लाओ..

देश में बाघों की संख्या अनुमान से भी अधिक तीव्र गति से कम हो रही है। राहत की बात है कि इनके संरक्षण मंे अनेकानेक योजनाएं चलायी गयी हैं और इनके रहने के स्थानों को सुरक्षित क्षेत्रों का दर्जा दिया गया है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की रिपोर्ट के अनुसार जिम कार्बेट, काजीरंगा, नागरहोल, कान्हा और तडोबा सुरक्षित क्षेत्रों में बाघ सुरक्षित हैं, पर सुरक्षित क्षेत्रों के बाहर के जंगलों में बाघ तेजी से कम हो रहे हैं। इसमें कोई संशय नहीं है कि बाघों के शत्रु और कोई नहीं, मनुष्य ही रह गये हैं। खुले जंगलों में इनका निरंतर शिकार हो रहा है और इनके नाखून तथा चमड़ी जापान, चीन तथा हांगकांग जैसे देशों को भेजी जाती हैं। बांध, कृषि, पशुओं के चारे, फोर-लेन हाइवे, कोयला खदानों, कारखानों, पत्तन आदि के निर्माण के लिए बहुत बड़े भूखंडों की जरूरत होती है। इन निर्माण कार्यो के लिए अक्सर बड़े पैमाने पर जंगलों को काटा जाता है। इससे बाघों के प्राकृतिक निवास स्थल नष्ट होते हैं। बाघों की जो स्वाभाविक वृत्ति है, वह उन्हें छोटे जंगलों में चैन नहीं देती। इससे यदि उन्हें न भी मारा जाये, तब भी उनका सहज जीवन छूट जाता है। बाघ, जिसका वैज्ञानिक नाम पैंथर टाइगर्स है, एक स्थलीय रात्रिचर शिकारी स्तनपायी है। इसे देश का राष्ट्रीय पशु होने का गौरव प्राप्त है। यह सभी तरह के निवास स्थलों- कांटेदार वनों से लेकर घने तराई के इलाकों में भी आराम से रह सकता है। हिमालय में यह 2000 मीटर की ऊंचाई पर भी मिलता है। 10 में बाघों की संख्या महज 1540 थी। इसे लुप्त होने से बचाने के लिए 1में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत की गयी। पलामू में आठ, मानस में दस, सिमलीपाल में दस, जिम कारबेट नेशनल पार्क में 11 और कान्हा में पांच बाघों की बढ़ोत्तरी एक वर्ष के अंदर हुई। बाघों को वास्तविक खतरा प्राकृतिक भोजन के लुप्त होने, जंगल घटने तथा शिकार से है। हाल के वर्षो में सुरक्षित जगहों पर भी उनके रोगग्रस्त होने तथा मरने की खबरें आयी हैं। जंगलों को सुरक्षित करने के अलावा उनके उपयुक्त इलाज तथा बेहतर स्टाफ दवा आदि की भी व्यवस्था करनी होगी। बाघों के शिकार को कानूनी के अलावा सामाजिक अपराध भी समझा जाना होगा। पर्यावरण मंे पशुओं के योगदान को भी समझना होगा। बाघ भारत की वन पारिस्थितिकी के जरूरी हिस्सा है।ड्ढr लेखक : पर्यावरणविद और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की सदस्य हैं।ं

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