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दस हजार किमी राजमार्ग के लिए ठेके जल्द

ेंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार आने वाले कुछ माह मंे 10 हजार किलोमीटर लंबे राजमागरे के निर्माण के लिए ठेका देने वाली है। इससे पहले सरकार वर्ष 2000 में 14,500 किलोमीटर लंबे राजमागरे का ठेका दे चुकी है, जिसके तहत 8500 किलोमीटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। लगभग 70 हजार करोड़ के राजमार्ग निर्माण कार्य का ठेका देने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेजी पर हैं। हालांकि राजमागरे से जुड़े अधिकारी दावा करते हैं कि यह फैसला अब इसलिए लिया गया है क्योंकि प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे अब जाकर सुलझे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के एक अधिकारी का कहना है कि वर्ष 2000 मंे जब राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) शुरू हुआ था, नियामक ने 80 हजार करोड़ की लागत से 14, 500 किलोमीटर लंबे राजमार्ग के निर्माण के लिए ठेका दिया था। अब जो ठेके दिए जाने हैं वह एनएचडीपी के तीसरे व पांचवे चरण का हिस्सा हैं। इसमें मौजूदा राजमागरे को चार लेन और छह लेन में बदलना शामिल है। एनएचडीपी के सात चरणों में से पांच चरणों में राजमागरे को उन्नत बनाने का काम शामिल है। सबसे पहले सड़क बनाने का काम निजी कंपनियों को सौंपा जाएगा। यह कंपनियां ‘निर्माण-संचालन-हस्तांतरण’ के आधार पर इनका विकास करेंगी। इसके तहत एक नियत अवधि तक निजी कंपनियां इस सड़कों पर टोल टैक्स वसूल करेंगी और उसके बाद उसे सरकार को हस्तांतरित कर देंगी।ड्ढr अगर निजी कंपनियां इस योजना में रुचि नहीं दिखातीं तो उन्हें सिर्फ निर्माण का ठेका दिया जाएगा। इसके तहत कंपनियां तय रकम के लिए राजमागरे का निर्माण करेंगी और उसके बाद उनका उससे कोई वास्ता नहीं रह जाएगा।ं

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