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अक्षम विभागों का पैसा सक्षम को दिया जाएगा

सरकारी योजनाआें की राशि खर्च करने में अक्षम विभागों से पैसा वापस लेकर काम करने वाले विभागों को दिया जाएगा। ऐसा करने से सरकार को राशि सरेन्डर नहीं करनी पड़ेगी और काम करने वाले विभागों को प्रोत्साहन भी मिलेगा। उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री ने उक्त घोषणा सोमवार को विधान परिषद में की। वे तृतीय अनुपूरक व्यय विवरणी पर चर्चा के बाद सरकार की आेर से उत्तर दे रहे थे।ड्ढr ड्ढr हालांकि वामपंथी सदस्यों ने इसका विरोध किया और सदन से बाहर चले गए। भाकपा की उषा सहनी ने इसे राशि का विचलन बताया तो माकपा के बासुदेव सिंह ने कहा कि सरकार को संबंधित विभाग से ही राशि खर्च करानी चाहिए। इसके पूर्व मुख्य विपक्षी पार्टी राजद के सदस्यों ने भी उत्तर शुरू होते ही सरकार को गरीब विरोधी बताते हुए सदन का बहिर्गमन किया।ड्ढr ड्ढr श्री मोदी ने कहा कि राज्य सरकार ने बाढ़ राहत वितरण में बड़ी राशि खर्च की लेकिन केन्द्र की आेर से इस मद में एक पैसे की भी मदद नहीं मिली। 11 हजार करोड़ का प्रस्ताव छह माह से लंबित है और हम आज भी आस लगाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि चरवाहा विद्यालय को छोड़ दें तो पूर्व की सरकारों के पास जनकल्याण की अपनी एक भी योजना नहीं थी और वे सिर्फ केन्द्र पर ही निर्भर करती थीं। चरवाहा विद्यालय भी उसी शासनकाल में बंद हो गए। आज मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, कबीर अंत्येष्टि योजना, कब्रिस्तानों की घेराबंदी की योजना सहित दो दर्जन से अधिक ऐसी कल्याणकारी योजनाएं हैं जो राज्य सरकार के बजट से संचालित होती हैं।ड्ढr ड्ढr इसके पूर्व चर्चा में भाग लेते हुए राजद के डा. भीम सिंह ने कहा कि पूर्ण बजट लाने की घोषणा करने वाली सरकार को इसलिए पूरक बजट लाने की आवश्यकता पड़ रही है कि उसने सरकारी राशि को विलासिता पर खर्च करना शुरू किया है। तृतीय पूरक बजट ‘वाहन क्रय बजट’ के अलावा कुछ नहीं है। चर्चा में राजद के मुंद्रिका सिंह यादव और रामबचन राय, जदयू के प्रेम कुमार मणि और राम बदन राय तथा भाजपा के रामकिशोर सिंह और माकपा के बासुदेव सिंह ने भाग लिया।

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