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फिर लुढ़का सेंसेक्स

देश के शेयर बाजारों के लिए सोमवार एक बार फिर काला साबित हुआ। विश्व भर के शेयरबाजारों में मंदी की आंधी के बीच बंबई शेयर बाजार (बीएसई) भी उड़ गया। बीएसई के सेंसेक्स में आज इसके इतिहास की दूसरी बड़ी अंक की गिरावट दर्ज की गई। नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 243 अंक टूटा। शुक्रवार को अमेरिका के शेयर बाजारों की स्थिति को देखते हुए मंदी का रूख रहने की प्रबल संभावना थी। हालांकि अमेरिका के फेडरल बैंक ने रविवार को आपात कदम के तहत डिस्काउंट रेट में चौथाई प्रतिशत की कटौती की, किन्तु वित्तीय बाजारों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए कोई भी कदम फिलहाल कारगर होता दिखाई नहीं दे रहा है।ड्ढr ड्ढr एशियाई शेयर बाजारों में सोमवार को हांगकांग का हैंगसैंक पांच प्रतिशत, चीन का शंघाई कम्पोजिट 3.6 प्रतिशत और जापान का निक्केई चार प्रतिशत नीचे आए। देश के शेयर बाजार कारोबार की शुरूआत से ही मंदी की गिरफ्त में थे। सेंसेक्स शुक्रवार के 15760.52 अंक की तुलना में चार सौ अंक से अधिक नीचा 15326.अंक पर खुला और इसके बाद बिकवाली के दबाव से यह सांस नही ले पाया और करीब साढ़े छह माह बाद पंद्रह हजार से नीचे उतरने के बाद इससे ऊपर नहीं उठ सका। नीचे में 14738.27 अंक तक गिरने के बाद समाप्ति पर इसकी तुलना में 70 अंक सुधर कर 1480अंक पर बंद हुआ। इसके मुकाबले सेंसेक्स का न्यूनतम स्तर पिछले साल 2अगस्त को 1404 अंक था। संेसेक्स में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट इसी वर्ष 21 जनवरी को 1408.35 अंक थी। अमेरिका के आवास ऋण क्षेत्र के संकट का यहां आईसीआईसीआई बैंक के शेयर पर खासा प्रभाव पड़तानजर आ रहा है। हालांकि बैंक ने पिछले दिनों स्पष्ट किया था कि सबप्राईम का प्रत्यक्ष रूप से उसका कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद बैंक के शेयर पर इतना अधिक बिकवाली का दबाव है कि यह अक्टूबर 2006 के बाद के न्यूनतम स्तर 757.40 रुपये का रह गया। आईसीआईसीआई का शेयर संेसेक्स का सर्वाधिक गिरावट वाला शेयर रहा और इसमें 13.76 प्रतिशत अर्थात 120.80 रुपये का भारी नुकसान हुआ। सेंसेक्स की तरह ही निफ्टी का हाल था। सत्र की शुरूआत में यह शुक्रवार के 4745.80 अंक की तुलना में 4745.45 अंक पर खुला और इससे ऊपर नहीं उठ सका। नीचे में 4482.10 अंक तक गिरने के बाद कुल 242.70 अंक अर्थात 5.11 प्रतिशत के नुकसान से 4503.10 अंक पर बद हुआ।ड्ढr ड्ढr बाजार की नजर अब अमेरिका के केंद्रीय बैंक फैडरल रिजर्व की मंगलवार को होने वाली बैठक पर है। इस बैठक में यह अटकलें जोरों पर हैं कि बैंक अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने के प्रयासों में ब्याज दरों में आधा से पौना प्रतिशत तक कटौती कर सकता हैं, किंतु विश्लेषकों का मानना है कि इससे भी बाजार को बहुत अधिक फायदा नहीं हो सकता है। बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि बीएसई सेंसेक्स में शामिल तीस की तीस कंपनियों के शेयर टूटा। नुकसान वाली पहली बीस कंपनियों में चार प्रतिशत से लेकर करीब 14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। बीएसई का रूख पूरी तरह गिरावट को दर्शाने वाला था कुल 2716 कंपनियों के शेयरों में कामकाज हुआ और महज 10.42 प्रतिशत अर्थात 283 कंपनियों के शेयर ही लाभ में रहे, जबकि 88.44 प्रतिशत अर्थात 2402 कंपनियों के शेयरों ने नुकसान का स्वाद चखा मात्र 31 कंपनियों के शेयर स्थित थे।

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