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आरक्षण नियमों को ले हंगामे पर सभापति को मंत्री के बचाव में उतरना पड़ा

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में आरक्षण नियमों की अनदेखी को लेकर मंगलवार को विधानपरिषद में जमकर हंगामा हुआ। उत्तेजित सदस्यों को शांत करने में सभापति प्रो. अरुण कुमार को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्वास्थ्य मंत्री चन्द्रमोहन राय के उत्तर से असंतुष्ट सदस्यों ने उनपर पूरक प्रश्नों की बौछार कर दी। विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी समान रूप से मंत्री पर हमला बोला। अंत में सभापति को ही मंत्री के बचाव में उतरना पड़ा। सभापति ने पूरे मामले को अपने स्तर से देखने का निर्णय सुनाया तब जाकर सदस्य शांत हुए।ड्ढr ड्ढr लोजपा के संजय सिंह ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से यह मामला उठाया था। उनके अनुसार इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में आरक्षित पद पर सामान्य वर्ग के डाक्टर की नियुक्ित कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि यह नियुक्ित बगैर साक्षात्कार के ही निदेशक के संबंधी होने के कारण की गई। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि उक्त पद पर आरक्षित वर्ग के किसी व्यक्ित ने आवेदन नहीं किया, इसलिए आवश्यकता को देखते हुए संविदा के आधार पर मात्र छह माह के लिए ही नियुक्ित की गई थी। उनके जवाब से श्री सिंह संतुष्ट नहीं हुए और न ही अन्य सदस्य।ड्ढr ड्ढr विपक्ष के नेता गुलाम गौस, नागेन्द्र प्रसाद सिंह, डॉ. भीम सिंह और मुन्द्रिका सिंह यादव ने भी मंत्री के उत्तर को नाकाफी बताया। संजय सिंह व नागेन्द्र सिंह ने सवाल किया कि आरक्षित पद पर सामान्य श्रेणी के व्यक्ित की नियुक्ित कैसे की जा सकती है? मंत्री ने पुन: अपना उत्तर दोहराया और बताया कि संविदा पर नियुक्ित हुई थी जिसकी अवधि दिसम्बर में ही खत्म हो चुकी है। अब नए सिरे से नियुक्ित के लिए विज्ञापन दिया जा रहा है। उनके जवाब पर सदन में हंगामा शुरू हो गया और सदस्य अपनी सीटों से उठकर एक साथ बोलने लगे। अंत में सभापति ने खुद हस्तक्षेप कर पूरे मामले को देखने की बात कही, तब जाकर उत्तेजित सदस्य शांत हुए।

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