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वोटर चुप, प्रत्याशी फांक रहे धूल

न कहीं कोई शोर है। और न वोट डालने की अपील करती गाड़ियां। चट्टी और स्थानीय बाजार में खुले पार्टियों के दफ्तरों में देशभक्ित के गीत बज रहे हैं। चुनावी कार्यालयों तक सीमित हैं नेताओं के पोस्टर और बैनर। यह नजारा है महाराजगंज संसदीय क्षेत्र का। उम्मीदवार और उनके समर्थक गांवों की धूल फांक रहे हैं। जनसंपर्क और छोटी मीटिंगों के सहार चल रहा है चुनाव प्रचार। वोटरों की चुप्पी देखकर लगता ही नहीं कि यहां पहले चरण में 16 अप्रैल को मतदान होना है।ड्ढr ड्ढr पलड़ा किसका भारी है, किसे वोट देंगे? इस सवाल से कटते हैं यहां के आम मतदाता। काफी कुरदने पर इसका फैसला गांव और टोले पर छोड़ने की बात कहते हैं। कहते हैं ‘मीटिंग में जेकरा बार में तय होई ओकर के वोट देल जाई।’ दूसरी ओर सभी पार्टियां मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुटीं हैं। राजद, जदयू, कांग्रेस और बसपा सभी के समर्थकों का अपना-अपना दावा है। सभी के अपने-अपने तर्क हैं, जिसे लोग ध्यान से सुन रहे हैं। बिना रिएक्ट किए। बड़े नेताओं की चुनावी सभा का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विपक्ष की नेता राबड़ी देवी ‘काम’ के आधार पर लोगों से वोट देने की अपील कर रही हैं।ड्ढr ड्ढr इन सभाओं में लोगों की भीड़ जुटती है। जिसमें समर्थकों के अलावा तमाशबीनों की भी खासी तादाद दिखती है। आम मतदाता विकास की बात तो करते हैं, लेकिन सड़क, अस्पताल, स्कूल और कानून-व्यवस्था में आए सुधार का कितना असर मतदान के पैटर्न पर पड़ेगा, इस बार में कुछ भी कहने से कतराते हैं। विकास के सवाल पर एकमा के मुबारक हुसैन का कहना था कि ‘भंडार त खा जाता नीचे वाला आदमी। इ देखे वाला कहां केहू बा।’ वहीं जलालपुर के सूरा सिंह का कहना था कि नए परिसीमन के बाद कुछ भी कहना कठिन है। नीतीश सरकार के आने के बाद विकास के काम में तेजी आई है। यह स्वीकारते हुए मांझी के केशवानंद गिरि का कहना था कि ‘नेता के त कामे है विकास, इ लोग केहु के खाए के थोड़े दीही।’ड्ढr ड्ढr छह विधानसभा को मिला कर गठित महाराजगंज संसदीय क्षेत्र में सीवान जिले का दो और सारण जिले का चार विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। जिसमें सीवान का गोरियाकोठी व महाराजगंज और सारण जिले का एकमा, मांझी, बनियापुर व तरैया शामिल है। गोरिया कोठी विधानसभा क्षेत्र के महाराजगंज में शामिल होने के कारण इस संसदीय क्षेत्र के जातिगत समीकरण में कुछ बदलाव आया है। इस संसदीय क्षेत्र के गोरिया कोठी और तरैया से राजद के विधायक हैं, जबकि महाराजगंज, बनियापुर और मांझी की सीट जदयू के खाते में है। चुनाव मैदान में जदयू के प्रभुनाथ सिंह के अलावा राजद के उमाशंकर सिंह, कांग्रेस के तारकेश्वर सिंह और बसपा के रविन्द्र नाथ मिश्र समेत कुल 13 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। तारकेश्वर सिंह पूर्व में मशरख के विधायक रह चुके हैं। जबकि पूर्व कांग्रेसी रविन्द्र नाथ मिश्र इस बार हाथ का साथ छोड़कर बसपा के हाथी पर सवार हैं।ड्ढr ड्ढr राजद प्रत्याशी उमाशंकर सिंह भी महाराजगंज से विधायक रह चुके हैं। 2004 के संसदीय चुनाव में जदयू के प्रभुनाथ सिंह ने राजद के जीतेन्द्र स्वामी को करीब साढ़े छियालीस हाार मतों से हराया था। इस चुनाव में प्रभुनाथ सिंह को 2,83,503 वोट मिले थे, जबकि जीतेन्द्र स्वामी को 2,37,041 मत प्राप्त हुए थे। राजद प्रत्याशी उमाशंकर सिंह जितेन्द्र स्वामी के पिता हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अलावा इस संसदीय क्षेत्र का कई बड़े नेताओं ने प्रतिनिधित्व किया है, जिसमें महेन्द्र नारायण सिंह, कृष्णकांत सिंह, एम पी सिंह, रामदेव सिंह, कृष्ण प्रताप सिंह, गिरिाा देवी और राम बहादुर सिंह शामिल हैं।

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