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पासपोर्ट सेवाओं के निजीकरण में खतरा

झारखंड के राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी ने देश में पासपोर्ट संबंधी अर्जियों के तेज निपटार के लिए कुछ सेवाओं के निजीकरण करने की पहल के खिलाफ लाल बत्ती दिखायी है। श्री नथवाणी गृह मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति के सदस्य भी हैं। इस संबंध में सुरक्षा के मुद्दों पर चिंता जताते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री एवं विदेश मंत्र को पत्र लिखा है।नथवाणी ने अपने पत्र में लिखा है कि यद्यपि पासपोर्ट अर्जियों का तेजी से निपटारा लोगों के हित में है तथा इसके लिए कदम उठाया जाना जरूरी है, लेकिन ऐसे उपायों में अंतर्निहित भय-स्थानों पर भी पूरा विचार कर लेना जरूरी है। क्योंकि इससे देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने पत्र में यह भी कहा है कि पासपोर्ट अर्जीकर्ताओं की मांग और उनकी भावनाओं के प्रति सरकार का रवैया स्वागत योग्य है, लेकिन इसे राष्ट्र की सुरक्षा को नजरअंदाज करके तरजीह नहीं दी जा सकती।सरकार ने इस संबंध में भाव मंगाते हुए प्रस्ताव अर्जियां आमंत्रित करने की कार्य विधि शुरू की है। भारत सरकार के 33 क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय एवं 15 कलेक्शन केंद्र हैं। इनमें पासपोर्ट की अर्जियां स्वीकृत होती हैं और आगे की कार्यवाही की जाती है। भारत सरकार, शायद किसी विदेशी आइटी कंपनी के सहयोग में, एक सॉफ्टवेयर विकसित करना चाहती है। निजी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी प्रारंभिक प्रक्रिया सेवाएं जैसे कि अर्जीकर्ताओं की बायोमेट्रिक छाप, अर्जियों की जांच-पड़ताल, पासपोर्ट का अनुमोदन रिन्युअल प्रदान करगी। लेकिन पासपोर्ट संबंधी सार्वभौम अधिकार भारत सरकार का रहेगा।लेकिन श्री नथवाणी का मानना है कि इसके चलते भी निजी सर्विस प्रोवाइडर एजेंसी को वह सब डेटा उपलब्ध हो जायेगा जो फिलहाल केवल एनआइसी (नेशनल इंफॉर्मेशन सेंटर) के पास रहता है। यह न केवल वैयक्ित खतर बल्कि राष्ट्र के लिए भी खतर से खाली नहीं। सांसद का कहना है कि पासपोर्ट किसी नागरिक के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। आतंकवादी एवं असामाजिक तत्व फर्जी पासपोर्ट या छेड़छाड़ किये पासपोर्ट का इस्तेमाल अपनी असली पहचान छिपाने के लिए करते हैं। किसी अपराध की जांच में इससे काफी बाधा पैदा होती है। सांसद का कहना है कि कुछ सेवाओं के निजीकरण की छूट देने से निजी एजेंसियों को पासपोर्ट संबंधी जो डेटा मुहैया हो जायेगा, इससे पूरी प्रणाली खतर में पड़ सकती है।इसलिए श्री नथवाणी ने सरकार से अनुरोध किया कि वह इस नाजुक मामले में निजी एजेंसी का दखल स्वीकार करने के बजाय ऐसे वैकल्पिक उपाय खोजे, जिससे इस प्रणाली की कार्यदक्षता बढ़े। उन्होंने यह सुझाव दिया कि इसके लिए कड़ी जांच-पड़ताल में ढील न देते हुए पासपोर्ट कार्यालयों एवं कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जाये, ताकि अर्जियों का निपटान तेजी से हो। इससे निजी कंपनियों को वह तमाम साइबर डेटा उपलब्ध कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी और हमार लोगों तथा प्रणालियों पर कोई खतरा नहीं रहेगा।

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